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Kanpur News: ढाई करोड़ की रंगदारी मामले में अखिलेश को हाईकोर्ट से जमानत नहीं

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कानपुर। अखिलेश दुबे कानपुर का प्रभावशाली व्यक्ति है। उसे जमानत मिली तो वह गवाहों को डरा सकता है और सबूतों से छेड़छाड़ कर सकता है। इसी टिप्पणी के साथ हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल ने होटल कारोबारी सुरेश पाल से ढाई करोड़ रुपये की रंगदारी वसूलने के मामले में आरोपी अखिलेश दुबे की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। हाईकोर्ट ने कहा कि तथ्य के गवाहों के बयान दर्ज होने के बाद अखिलेश नई जमानत याचिका दाखिल कर सकता है।
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स्वरूपनगर निवासी कारोबारी सुरेश पाल ने सात अगस्त 2025 को किदवईनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप था कि वर्ष 2022 में अधिवक्ता अखिलेश दुबे द्वारा साजिश के तहत उन्हें दुष्कर्म के झूठे मुकदमे में फंसाया गया। इससे बचाने के लिए उनसे ढाई करोड़ रुपये की रंगदारी वसूली गई। इस एफआईआर से एक दिन पहले ही पुलिस ने भाजपा नेता रवि सतीजा द्वारा भी झूठे मुकदमे में फंसाकर रंगदारी वसूलने के मामले में अखिलेश और उसके साथी लवी मिश्रा को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
अखिलेश के खिलाफ एक-एक कर पांच मुकदमे दर्ज हुए थे। एक मुकदमा भाजपा नेता रवि सतीजा द्वारा बर्रा थाने में दर्ज कराया गया था। दो मुकदमे किदवईनगर थाने में शैलेंद्र कुमार व सुरेश पाल द्वारा दर्ज कराए गए थे। एक मुकदमा अधिवक्ता संदीप शुक्ला द्वारा कोतवाली में दर्ज कराया गया था। एक अन्य मुकदमा वक्फ की संपत्ति पर कब्जे के मामले में ग्वालटोली थाने में दर्ज हुआ था।
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जूही थाने में दर्ज प्रज्ञा त्रिवेदी के मुकदमे की अग्रिम विवेचना में भी अखिलेश का नाम आने पर चार्जशीट दाखिल हुई है। इनमें से संदीप शुक्ला, शैलेंद्र कुमार और प्रज्ञा त्रिवेदी के मुकदमों में अखिलेश को सेशन कोर्ट से ही जमानत मिल चुकी है। रवि सतीजा के मुकदमे में हाईकोर्ट से जमानत याचिका खारिज होने के कारण अखिलेश को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा था और पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट से अखिलेश को इस मुकदमे में भी जमानत मिल गई थी। जेल से रिहाई के लिए उसे एक बार फिर उसे सुप्रीम कोर्ट जाना होगा।
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