लोको शेड के इंजीनियरों केे मुताबिक उन्हें बाहर से सिर्फ छह शॉवर खरीदने पड़े, जिनकी लागत 75 रुपये प्रति शावर थी। उनके पास पुरानी रिले मशीन होने से टाइमर भी लगा दिया गया। टनल में घुसने पर जैसे ही फर्श पर पैर पड़ेगा, शॉवर से 10 सेकेंड के लिए छिड़काव होगा। उन्होंने रेक्सीन का कवर और कबाड़ में निकले लोहे के एंगल से इसे तैयार किया है।
बांस का ढांचा सबसे सस्ता
रेलवे ने फजलगंज लोको शेड में जो टनल तैयार की है, उसे बाहर बनाने में करीब 20 हजार रुपये का खर्च आएगा। शेड में तो यह कबाड़ के सामान से तैयार की गई है। सबसे सस्ते बांस का ढांचे से घर में इस्तेमाल होने वाली चादरों से इसे बनाया जा सकता है। इसमें आधा हार्स पावर की मोटर पंप की जरूरत होती है, जिसकी कीमत करीब साढ़े तीन से चार हजार रुपये है। बांस के ढांचे से 15 फीट लंबी टनल पांच से छह हजार रुपये में तैयार हो जाएगी।
इस सैनिटाइजिंग टनल को अगर मेडिकल टीम उपयुक्त बताती है और ट्रायल में यह पास हो गई तो इसका उपयोग आगे भी किया जा सकता है।
अजीत कुमार सिंह, सीपीआरओ, एनसीआर