रेलवे की लापरवाही एक बार फिर सामने आई है। 24 मई को कानपुर से पटना-कोटा एक्सप्रेस पकड़ने के बाद से लापता कारोबारी का शव तीन दिन बाद ट्रेन के टॉयलेट से बरामद हुआ।
24 मई की सुबह 6:40 बजे कानपुर के संजय ट्रेन में बैठे थे और उनका शव 72 घंटे बाद रविवार सुबह सात बजे बरामद हुआ। शव तीन दिन तक स्लीपर कोच के टॉयलेट में घूमता रहा। गाड़ी कोटा तक गई और वहां से वापस पटना आई, लेकिन इस बीच न तो सफाईकर्मियों ने शौचालय को साफ करने की जहमत उठाई और न ही सुरक्षाबलों ने लंबे समय से बंद दरवाजे को खोल कर देखना उचित समझा। यात्रियों ने टॉयलेट बंद होने और बदबू आने की सूचना कई बार दी लेकिन किसी ने ध्यान ही नहीं दिया।
रविवार की सुबह राजेंद्र नगर टर्मिनल यार्ड में खड़ी कोटा-पटना एक्सप्रेस की स्लीपर बोगी के टॉयलेट से रेलवे पुलिस ने तीन दिन पुराना शव बरामद किया। मृतक की पहचान कानपुर के आनंदपुरी में मकान नंबर 321 निवासी व्यवसायी संजय अग्रवाल (48) के रूप में हुई। संजय कानपुर से आगरा जाने के लिए निकले थे लेकिन पहुंचे नहीं। खोजबीन करने के बाद उनके साले जयदीप ने कानपुर सेंट्रल रेल पुलिस को गुमशुदगी की तहरीर दी थी। सूचना पर उनके रिश्तेदार राजेंद्र नगर टर्मिनल पहुंचे। जहां पुलिस ने पोस्टमॉर्टम कराने के बाद शव उन्हें सौंप दिया। लाश सड़ चुकी थी। कानपुर के अनवरगंज स्थित 64 तेजाब मिल कैंपस निवासी जयदीप के मुताबिक संजय अग्रवाल का इंवर्टर का व्यापार है। उन्हें आगरा में पारिवारिक मंदिर में दर्शन के लिए जाना था। 24 मई की सुबह संजय को बेटे वात्सल्य ने कानपुर सेंट्रल स्टेशन पर छोड़ा। वह एसी में जगह नहीं मिलने पर पटना-कोटा एक्सप्रेस के स्लीपर कोच में बैठे थे। सुबह साढ़े आठ बजे अंतिम बार पत्नी दीपाली अग्रवाल से उन्होंने बात की और बताया कि वह फफूंद स्टेशन पार कर रहे हैं। काफी गर्मी है इससे उन्हें बेचैनी हो रही है। ट्रेन में सवार यात्रियों ने कई बार टॉयलेट लॉक होने और टॉयलेट से बदबू आने की बात कही थी लेकिन किसी ने गौर नहीं किया। संजय की लाश सड़ चुकी थी।