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Kanpur: जेके कैंसर अस्पताल में रेडियोथैरेपी मशीन खराब, नर्स-वार्ड बॉय का टोटा…इन अस्पतालों की भी स्थिति गड़बड़

Thu, 27 Mar 2025 03:51 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: महानगर के अस्पतालों में स्वास्थ्य व्यवस्था में कई सुधार हुए, लेकिन रोगियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए इंतजाम नाकाफी साबित हो रहे हैं। अस्पतालों में सुविधाएं बढ़ाने और बेहतर उपचार के लिए आठ साल में 23 प्रस्ताव भेजे, लेकिन किसी का कुछ भी नहीं हुआ।
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जेके कैंसर इंस्टीट्यूट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कानपुर में जेके कैंसर अस्पताल में सुविधाएं बढ़ाने और रोगियों को बेहतर उपचार दिलाने के लिए पिछले आठ साल में 23 बार प्रस्ताव शासन को भेजा गया पर हुआ कुछ नहीं। यहां रोज 300-350 रोगी ओपीडी में आते हैं। 106 बेड भी पूरे भरे रहते हैं। अस्पताल में रेडियोथैरेपी करने वाली मशीन लीनियर एक्सीलेरेटर खराब हो गई है। नई मशीनों के लिए 10 से 15 बार प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं।

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अस्पताल में सुविधाओं के लिए पूर्व सांसद सत्यदेव पचौरी, विधायक नीलिमा कटियार और विधायक सुरेंद्र मैथानी काफी कोशिश में लगे रहे। 106 बेड के अस्पताल में छह बेड का आईसीयू भी है, जो टेक्नीशियन टीम न होने के चलते संचालित नहीं हो पा रहा है। पैथोलॉजी विभाग में भी कोई नहीं है। सिर्फ 18 नर्सें और 10 वॉर्ड बॉय हैं, जबकि यहां 50-60 नर्स और 40-50 वॉर्ड बॉय की जरूरत है।

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136 करोड़ का प्रस्ताव भेजकर नए भवन की मांग
अस्पताल में 13 डॉक्टर हैं, एक रेडियोलॉजिस्ट का पद खाली है। निदेशक डॉ. एसएन प्रसाद ने बताया कि अस्पताल में सर्जरी विभाग, निश्चेतना विभाग और पैथोलॉजी विभाग के लिए पूरी टीम की आवश्यकता है। रोगियों की संख्या बढ़ती जा रही है, लेकिन भवन जर्जर होने के चलते उसका विस्तार भी नहीं किया जा सकता है।  136 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजकर नए भवन की मांग की है।

पीडब्ल्यूडी के सर्वे में किया जा चुका है जर्जर घोषित
इसमें आईसीयू, मॉड्यूलर ओटी और तीन नए विभाग ऑन्को सर्जरी, पैथोलॉजी और निश्चेतना विभाग भी बनाया जा सके। वर्तमान में संचालित भवन को 2018 में पीडब्ल्यूडी के सर्वे में जर्जर घोषित किया जा चुका है। यहां कैंसर की विशिष्ट जांचों हिस्टोपैथोलॉजी, बॉयोप्सी और आईएचसी (इम्युनोहिस्टो केमिस्ट्री) मार्किंग की आवश्यकता अधिक है।

12 साल से कबाड़ पड़ी है मशीन
करोड़ों की लागत से आई लीनियर एक्सीलेरेटर मशीन 12 साल से कबाड़ पड़ी है। मशीन की सर्विस नहीं हो सकी और इसके चलते यह कमरे में बंद है। इस मशीन से मुख, खाने की नली, बच्चेदानी के मुहाने सहित कई तरह के कैंसर की रेडियोथैरेपी की जाती थी, जिससे रोगियों को साइड इफेक्ट्स बहुत कम होते थे। 2019 के बाद से अस्पताल में कोबॉल्ट मशीन से रेडियोथैरेपी की जा रही है, जिसके साइड इफेक्ट्स अधिक हैं।

बर्न वार्ड और इंटेसिव केयर यूनिट अभी नहीं हुई शुरू
हैलट अस्पताल का बर्न वार्ड चालू नहीं हो पाया। उपकरण भी नहीं मिल पाए हैं और न प्रशिक्षित स्टाफ की नियुक्ति हुई है। इससे बर्न रोगियों को इलाज नहीं मिल पा रहा है। इसके साथ ही कारपोरेट हॉस्पिटल की तर्ज पर वार्ड फिफ्टी अभी चालू नहीं हो पाया है। इसके साथ ही ट्रॉमा सेंटर को मंजूरी तो मिल गई लेकिन अभी भवन निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया। अस्पताल परिसर डायग्नोस्टिक हब का भी काम शुरू नहीं हो पाया है। इससे एक छत के नीचे रोगियों को सभी जांचों की सुविधा नहीं मिल पा रही। इसके सभी उपकरण भी अभी नहीं आए हैं। सौ बेड की इंटेसिव केयर यूनिट अभी शुरू नहीं हुई है। इसके साथ ही आक्सीजन थैरेपी अभी चालू नहीं हो पाई है। स्टेम सेल बैंक भी अभी नहीं बना।

बहरेपन की जांच करने वाली मशीन है पर चलती नहीं
उर्सला में 2023 में बहरेपन की जांच करने वाली मशीन आई थी पर अभी तक वह शुरू नहीं हो सकी है। इस मशीन से पता चलता है कि बहरापन कितने प्रतिशत है। इस मशीन से दिव्यांग प्रमाणपत्र भी बनाए जाते हैं। निदेशक डॉ. एचडी अग्रवाल ने बताया कि मशीन में अपडेटेड सॉफ्टवेयर नहीं है। इसके लिए शासन से अनुमति लेकर कंपनी को मांग भेजनी होगी।

नए भवन में आठ साल से शुरू नहीं हुई ओटी
उर्सला में आठ साल से बनी ओटी अब तक शुरू नहीं हो सकी है। कभी ऑक्सीजन पाइपलाइन का न होना तो कभी लिफ्ट की खराबी का हवाला दिया गया। रोगियों की संख्या में आठ साल में 20 फीसदी की बढ़ोत्तरी हुई है। निदेशक डॉ. एचडी अग्रवाल ने बताया कि ओटी लिफ्ट की वजह से शुरू नहीं हो सकी है। इसे जल्द ही शुरू करेंगे।

दो साल पहले आई एक्सरे मशीन अब तक नहीं हुई शुरू
पोस्टमार्टम हाउस में दो साल पहले आई एक्सरे मशीन अब तक शुरू नहीं हो सकी। यहां गन शॉट से हुई मौत में एक्सरे करने की आवश्यकता पड़ती है। शव के शरीर में जांचना पड़ता है कि बुलेट है या नहीं। यहां अभी तक इसे चलाने के लिए ऑपरेटर की नियुक्ति नहीं हुई है।

एक्सरे मशीन तो है पर फिल्म नहीं, लैब बनी पर टेक्नीशियन नहीं
शिवराजपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में लाखों रुपये से मंगाई गई एक्सरे मशीन तो है, लेकिन फिल्म न होने से रोगियों को एक्सरे बाहर से करवाना पड़ता है। सीएचसी में लैब तैयार हो गई है, लेकिन लैब टेक्नीशियन न होने से रोगियों को निजी पैथाेलॉजी से जांचें करानी पड़ रही हैं। एक्सरे तकनीशियन संजय ने बताया कि कई बार उच्च अधिकारियों को एक्सरे फिल्म न होने की बात कही है, लेकिन अभी तक एक्सरे फिल्म उपलब्ध नहीं हो पाई है। सीएचसी प्रभारी डाॅ. अनुज दीक्षित का कहना है कि जल्द उच्चाधिकारियों से लिखित शिकायत की जाएगी।

डिप्टी सीएम के कार्यक्रम में आए टीबी रोगियों को नहीं मिल रहा पोषण भत्ता
प्रदेश सरकार के आठ साल पूरे होने पर सीएसए में आयोजित संवाद कार्यक्रम में कुछ टीबी रोगियों को भी बुलाया गया। ये रोगी मुरारी लाल चेस्ट हॉस्पिटल, हैलट, सीएचसी आदि अस्पतालों में इलाज करा रहे थे। एक रोगी ने बताया कि एक साल से इलाज करा रहे हैं। कोई भी पैसा पोषण के लिए नहीं मिला और न ही पोषण पोटली मिली है। एक अन्य रोगी ने बताया कि डेढ़ साल से मुरारीलाल अस्पताल में टीबी का इलाज निशुल्क करा रहे हैं। पोषण के लिए एक रुपया भी नहीं मिला है।
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13 साल से कोई स्थायी फिजीशियन नहीं, भवन भी जर्जर
केपीएम अस्पताल का भवन जर्जर हो चुका है। यहां पर 13 साल को कोई स्थायी फिजीशियन नहीं है। फरवरी 2024 में डॉक्टर दीपक निगम की नियुक्ति हुई भी थी। तीन महीने बाद उनका स्थानांतरण हो गया, तब से कोई फिजीशियन नहीं है। अस्पताल में हर रोज 250 मरीज सर्दी-जुकाम, बुखार, खांसी, पेट दर्द आदि के आते हैं। अस्पताल में डॉक्टरों के 17 पद हैं, 14 डॉक्टर ही वर्तमान में तैनात हैं। हृदय रोग, स्किन फिजीशियन का पद खाली हो गया है। तीन ईएमओ में दो ईएमओ हैं।
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