राजनीतिक दलों के घोषित प्रत्याशियों ने गांवों की ओर दौड़ तेज कर दी है। टिकट कटने से नाराज दावेदार ‘खेल’ बिगाड़ने का रास्ता तलाश रहे हैं। कांग्रेस पर सपाइयों का रुख भी कुछ बदला नजर आ रहा है।
बांदा के चारों विधानसभा सीटों पर प्रमुख दलों के प्रत्याशी घोषित हो गए। सिंबल मिलने के बाद प्रत्याशियों ने अपने पाले में मतदाताओं को लाने की कवायदें तेज कर दीं। एक दिन में 10 गांवों के भ्रमण का टारगेट लेकर प्रत्याशी भ्रमण में लगे हैं। हालांकि स्थानीय मुद्दों पर बात कम प्रतिद्वंद्वियों और सरकारों पर कटाक्ष ज्यादा हो रहे हैं।
बसपा प्रत्याशी परंपरागत वोट बैंक समेत पिछड़ों को साधने में लगे हैं तो भाजपा उम्मीदवार भी केंद्र की उपलब्धियां गिना रहे हैं। सपा से गठबंधन पर कांग्रेसीजनों में खुशी है तो सपा नेता फिलहाल खामोशी अख्तियार किए हैं।
उधर, टिकट कटने पर दलों में बगावत भी हो रही है। भाजपा से वैश्य वर्ग के दावेदारों में खासी नाराजगी है। भाजपा और सपा में तिंदवारी सीट को लेकर ज्यादा घमासान है। भाजपा में यहां से क्षत्रिय प्रत्याशी उतारने की मांग तेज है और सपा में राष्ट्रीय महासचिव की पत्नी शकुंतला निषाद का टिकट कटने पर रोष है।