उत्तर प्रदेश के कानपुर में बिधनू ब्लाक के कुरौना बहादुरपुर गांव में गुजरात और दूसरे शहरों से कामकाज छोड़कर छह युवक वापस अपने घर आ गए हैं। इनको यहां के प्राइमरी स्कूल में बनाए गए क्वॉरंटीन सेंटर में रखा गया है लेकिन अव्यवस्था की सारी पोल उस समय खुल गई जब बृहस्पतिवार को अमर उजाला की टीम वहां पहुंची। क्वॉरंटीन सेंटर खाली पड़ा था। छह युवक गायब थे।
हम जब गांव पहुंचे तो वहां के लोगों से क्वॉरंटीन सेंटर का पता पूछा। फिर थोड़ी देर चलने के बाद प्राइमरी स्कूल क्वॉरंटीन सेंटर पहुंचे तो मुख्य गेट खुला हुआ मिला। दो-तीन बार आवाज लगाने के बाद जब अंदर से कोई आवाज नहीं आई तो हम अंदर चले गए। अंदर सांय-सांय हो रहा था। एक कमरे में झांक कर देखा तो पांच बिस्तर लगे थे। पंखा लगा था, साफ-सफाई भी ठीक थी।
खेत में काम करते मिले दो युवक
- फोटो : amar ujala
लेकिन क्वॉरंटीन सेंटर में रखे गए छह लोग गायब थे। वहां से वापस आकर प्रधान मरदान सिंह से पूछा तो उन्होंने तपाक से कहा कि छहों लोग क्वॉरंटीन सेंटर में हैं। जब हमने उन्हें क्वॉरंटीन सेंटर खाली होने की जानकारी दी तो खोजने के लिए भगदड़ मच गई। प्रधान अपनी मोटरसाइकिल से निकले लेकिन बैरंग लौट आए।
कई गांव वाले भी युवकों को खोजने निकले लेकिन कुछ पता नहीं चला। थोड़ी देर बाद पता चला कि क्वॉरंटीन किए गए लड़कों में से दो लड़के एक खेत में अपने गांव के दोस्तों के साथ बातचीत कर रहे थे। बाकी लड़कों का पता नहीं चला। मिले दोनों लड़कों ने बताया कि वह अंदर बैठे बैठे उबने लगे थे इसलिए बाहर निकलकर घूमने चले गए।
क्वारंटीन सेंटर की देखभाल करने वाले भी गायब मिले
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मैं सूरत में साड़ी मिल में काम करता था। यहां आने पर पहले दिन टेस्ट हुआ पर रिपोर्ट पॉजिटिव नहीं आई, इसके बावजूद क्वॉरंटीन सेंटर में रखा गया। समझ नहीं आ रहा है कि काम कैसे मिलेगा, वापस जाएं या नहीं।
गोलू उर्फ रोहित निवासी कुरौना बहादुरपुर
डेढ़ साल से सूरत की कपड़ा मिल में काम कर रहा था। यहां मुझे क्वॉरंटीन सेंटर में रखा गया है। अगले 6 महीने तक वापस जाने की हिम्मत नहीं हो रही है। यहीं पर कोई काम धंधा देखेंगे।
पंकज निवासी कुरौना बहादुरपुर
सभी लड़कों को क्वॉरंटीन सेंटर में रखा गया है। ये लोग अचानक कहां चले गए समझ में नहीं आ रहा है। पता लगा रहा हूं। इनकी निगरानी अब बढ़ाई जाएगी।
मरदान सिंह सेंगर, ग्राम प्रधान