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Kanpur News: पं. नेहरू ने रखी थी तिलक हॉल की नींव, पसंद था शहर का मक्खन मलाई

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अशोक पॉलीटिकल लाइब्रेरी तिलक हाल में बाबू नारायणप्रसाद अरोड़ा के साथ पण्डित नेहरू - फोटो : आर्काइव
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कानपुर। पंडित जवाहरलाल नेहरू का कानपुर से गहरा लगाव था। यह उनके राजनीतिक और व्यक्तिगत जीवन में भी झलकता था। 14 सितंबर 1931 को कानपुर आए पं. जवाहर लाल नेहरू ने मेस्टन रोड में तिलक हॉल की नींव रखी थी। वह सबसे अधिक बार कानपुर आने वाले प्रधानमंत्री भी रहे। सन 1964 तक वे करीब सात बार शहर आए। यहां उन्होंने फूलबाग में कई जनसभाएं और तिलक हॉल में कई कार्यक्रमों में हिस्सा लिया।
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शहर के कई बड़े नेताओं से उनका काफी मिलना-जुलना भी रहा। उनके मिलने वाले बताते हैं कि पं. नेहरू कानपुर के मक्खन मलाई के शौकीन थे और वह जब भी शहर आते तो इसे जरूर खाते थे। कानपुर इतिहास समिति के महासचिव अनूप कुमार शुक्ल ने बताया कि आजादी से पहले शहर में आयोजित एक सभा में पं. जवाहर लाल नेहरू भी शामिल हुए। सभा को संबोधित करने के दौरान उन्होंने स्वतंत्रता सेनानी पं. बाल कृष्ण शर्मा नवीन से पूछा कि कामरेड शब्द की हिंदी बताओ तो तुरंत ही उन्होंने हंसते हुए इसका जवाब सखा दिया। तब नेहरू जी ने कहा कि यह संस्कृत शब्द है इसे हिंदी में बोलो। इस पर नवीन जी ने इसे गुइयां कहा। इसके बाद नेहरू जी ने अपने पूरे संबोधन में कामरेड शब्द की जगह पर इसी शब्द का प्रयोग किया। वहीं पं. नेहरू के मित्रों में डॉ. जवाहर लाल रोहतगी भी रहे। वह जब भी शहर आते उनके घर जरूर जाते। डॉ. रोहतगी का भी उनसे लगाव रहा। सन 1956 में पं. नेहरू भारत सेवक समाज के अधिवेशन में शहर आए थे।
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