कानपुर के हैलट ओपीडी में स्वाइन फ्लू के लक्षणों वाले 17 रोगियों ने जांच कराई। ये रोगी जुकाम-खांसी, तेज बुखार और निमोनिया की गिरफ्त में रहे हैं। तीन रोगियों में स्वाइन फ्लू के गंभीर लक्षण मिले, इन रोगियों की सांस फूल रही थी।
इनका सैंपल जांच के लिए मेडिकल कालेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग भेजा गया है। अब तक पांच रोगियों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई है और संक्रामक रोग अस्पताल से 20 रोगियों के सैंपल जांच के लिए माइक्रोबायोलॉजी विभाग भेजे गए।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
हैलट के मेडिसिन और बालरोग अस्पताल की ओपीडी में स्वाइन फ्लू के लक्षणों वाले रोगियों की संख्या बढ़ रही है। जिन रोगियों में सांस फूलने की दिक्कत अधिक पाई जाती है, उन्हें संक्रामक रोग अस्पताल भेज लार के सैंपल की जांच कराई जाती है।
मंगलवार को सिविल लाइंस की महिला रोगी और बिल्हौर के रोगी की ओपीडी जांच के बाद सैंपल जांच को भेजा गया। मुरारीलाल चेस्ट हॉस्पिटल में भर्ती रोगी करन (18) में स्वाइन फ्लू के लक्षण मिलने पर जांच कराई जा रही है।
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जिन रोगियों का सैंपल निगेटिव आ रहा है उन्हें डाक्टर सामान्य फ्लू मान ले रहे हैं। मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. रिचा गिरि ने बताया कि सामान्य फ्लू के रोगियों की संख्या बढ़ रही है। जिन रोगियों को सांस फूलने, तेज बुखार, कमजोरी आदि लक्षण होते हैं। उनकी जांच करा ली जाती है।
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स्वाइन फ्लू के लक्षण
- अचानक बुखार आना
- तेज ठंड लगना
- गला खराब हो जाना
- मांसपेशियों में दर्द होना
- तेज सिरदर्द होना,
- खांसी आना
- कमजोरी महसूस करना आदि लक्षण इस बीमारी के दौरान उभरते हैं।
स्वाइन फ्लू से बचाव के उपाय
- आराम करना, खूब पानी पीना, शरीर में पानी की कमी न होने देना इसका सबसे बेहतर उपाय है।
- स्वाइन फ्लू का वायरस हवा में ट्रांसफर होता है और खांसने, छींकने, थूकने से वायरस सेहतमंद लोगों तक पहुंच जाता है।
- किसी व्यक्ति में स्वाइन फ्लू के लक्षण दिखें तो उससे कम से कम तीन फीट की दूरी बनाए रखें।
- अगर किसी में स्वाइन फ्लू के लक्षण दिखें तो उससे हाथ मिलाने और गले मिलने से बचना चाहिए।