निदेशक कार्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन
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इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आईआईटी) कानपुर के दलित असिस्टेंट प्रोफेसर के उत्पीड़न में चार प्रोफेसरों पर हुई एफआईआर के बाद से विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। फोरम की सभी मांगें ठुकराए जाने से नाराज प्रोफेसरों ने बुधवार से असहयोग आंदोलन की शुरूआत कर दी। प्रोफेसरों ने प्रशासनिक कामकाज छोड़ दिया तो उनकी पत्नियों ने निदेशक कार्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन कर अपना विरोध दर्ज कराया।
प्रोफेसरों ने मांग की है कि चारों प्रोफेसरों पर लगे आरोपों को निदेशक स्पष्ट करें और बताएं कि क्या सभी आरोप सही साबित हुए हैं या नहीं। जब इंस्टीट्यूट प्रशासन ने चारों के खिलाफ एससी-एसटी उत्पीड़न का कोई मामला नहीं पाया है तो उनपर क्यों एफआईआर की गई। प्रोफेसरों की पत्नियों ने मांग की कि इंस्टीट्यूट प्रशासन चारों प्रोफेसरों का केस लड़े और मीडिया को भी स्पष्ट करे कि चारों पर एससी-एसटी का कोई मामला नहीं है। प्रोफेसरों की पत्नियों का एक प्रतिनिधिमंडल निदेशक से मिला लेकिन निदेशक ने उनकी सभी मांगों को मानने से इंकार कर दिया।
निदेशक बोले, आप लोग मामले को उछाल रही हैं
प्रोफेसरों की पत्नियों से मुलाकात के दौरान निदेशक प्रो. अभय करंदीकर ने धरना-प्रदर्शन को गलत ठहराया। कहा कि आप विरोध करके इस मामले को उछाल रही हैं। ऐसे में इसका निस्तारण सही तरीके से नहीं हो पाएगा। उन्होंने सभी को शांत होने के लिए सलाह दी।