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Kanpur News: प्रो. बुशरा को मिलेगा घनश्यामदास बिड़ला वैज्ञानिक शोध पुरस्कार

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कानपुर। वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में 2025 का प्रतिष्ठित घनश्यामदास बिड़ला वैज्ञानिक शोध पुरस्कार आईआईटी कानपुर की प्रोफेसर बुशरा अतीक को दिया जाएगा। यह पुरस्कार केके बिरला फाउंडेशन की ओर से देश में कार्यरत 50 वर्ष या उससे कम आयु के भारतीय वैज्ञानिकों को उनके उल्लेखनीय वैज्ञानिक योगदान के लिए दिया जाता है। पुरस्कार के अंतर्गत पांच लाख रुपये की सम्मान राशि प्रदान की जाती है। इसकी विशेषता आयु सीमा है जो युवा और मध्य आयु वर्ग के वैज्ञानिकों को प्रोत्साहित करती है।
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प्रो. बुशरा अतीक आईआईटी कानपुर के जैविक विज्ञान एवं जैव अभियांत्रिकी विभाग में प्रोफेसर हैं और वर्तमान में संस्थान की अंतरराष्ट्रीय संबंधों की डीन भी हैं। वह डीबीटी-वेलकम ट्रस्ट इंडिया एलायंस की सीनियर फेलो हैं और कैंसर के क्षेत्र में प्रभावशाली एवं अनुवादात्मक बायोमेडिकल अनुसंधान का नेतृत्व कर रही हैं। उनका शोध विशेष रूप से प्रोस्टेट और कोलोरेक्टल कैंसर पर केंद्रित है। प्रो. अतीक के शोध से यह महत्वपूर्ण निष्कर्ष सामने आया है कि उन्नत प्रोस्टेट कैंसर में प्रयुक्त कुछ एंटी-एंड्रोजन दवाएं हानिकारक हो सकती हैं।

साथ ही उन्होंने केसिन किनेज-1 अवरोधकों को प्रभावी सहायक उपचार के रूप में चिन्हित किया है। बरेली से अपनी शैक्षणिक यात्रा शुरू करने वाली प्रो. बुशरा अतीक ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा प्राप्त की। देश-विदेश के प्रतिष्ठित संस्थानों में शोध अनुभव के बाद उन्होंने 2013 में आईआईटी कानपुर में कार्यभार संभाला। इससे पहले उन्हें शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार सहित कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से सम्मानित किया जा चुका है।
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