भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर (बार्क) उन्नाव में रेडिएशन प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करेगा। बार्क का मानना है कि गंगा बेसिन (कानपुर और उसके आसपास के जिलों) में आलू, प्याज, मीट और मछली का अच्छा कारोबार होता है, उन्नाव में प्रोसेसिंग यूनिट लगने से इन कारोबारों को बड़ा फायदा मिलेगा।
रेडिएशन प्रोसेसिंग से फल, फ्रूट, सब्जी, फसल, मीट और मछली की गुणवत्ता बढ़ाई जाती है। खाद्य सुरक्षा के लिहाज से यह तकनीक बेहद कारगर है। रेडिएशन प्रोसेसिंग के बाद फसल, फल या सब्जी के खराब होने की संभावना खत्म हो जाती है। गेहूं, चावल, धान में कीट नहीं लगते हैं।
न्यूक्लियर एनर्जी और रेडिएशन का इस्तेमाल सिर्फ बम बनाने या बिजली उत्पादन मेें ही नहीं किया जाता बल्कि इसकी मदद से आलू, प्याज को भी खराब होने से बचाया जा सकता है। समय से पहले आलू, प्याज के जर्मिनेशन का खतरा टाला जा सकता है।
यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजी (यूआईईटी) सीएसजेएम यूनिवर्सिटी और भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर (बार्क) ने बुधवार को कैंपस स्थित लेक्चर हाल कांप्लेक्स में प्रदर्शनी, राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया। इसका उद्घाटन आईआईटी कानपुर के डॉयरेक्टर प्रो. इंद्रनील मन्ना ने किया।
डॉयरेक्टर ने कहा कि विकास दर आठ फीसदी के आसपास पहुंची तो बिजली उत्पादन छह गुना बढ़ाना होगा। इससे युवाओं को रोजगार मिल सकेगा। प्रदर्शनी में यह भी बताया गया कि न्यूक्लियर एनर्जी सिर्फ बम या बिजली बनाने के काम में ही नहीं आती है।
इसका इस्तेमाल खाद्य सुरक्षा, जल शुद्धि करण, नई प्रजाति के बीज विकसित करने, चिकित्सा, शिक्षा और उद्योग धंधों में भी किया जा रहा है। आईआईटी के प्रो. ओमपाल सिंह, डॉ. शिखा प्रसाद, बार्क के मीडिया इंचार्ज आरके सिंह और संगोष्ठी के संयोजक मनीष गुप्ता ने कहा कि न्यूक्लियर एनर्जी ने 60 साल पूरे कर लिए हैं।
अब हीरक जयंती समारोह मनाया जा रहा है। इसके तहत ही संगोष्ठी, प्रदर्शनी का आयोजन किया गया है। क्विज कंप्टीशन भी कराया गया है। इसके विजेताओं को नि:शुल्क बार्क ले जाने और उसकी व्यवस्था से परिचित कराने की पहल की गई है। इस कार्यक्रम में स्टूडेंट्स ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।