दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित भारत बचाओ रैली में शनिवार को कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी उन्नाव दुष्कर्म मामले को याद कर भावुक हो गईं। उन्होंने कहा- हाल ही में मैं पीड़ित के पिता से मिली थी। उनसे मिलकर मुझे मेरे पिता की याद आ गई थी।
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उन्नाव कांड के बाद पीड़िता के परिजनों से मिली थीं प्रियंका
- फोटो : अमर उजाला
जब मैं 19 साल की थी, तब अपने पिता के छलनी शरीर को लेकर घर आई थी। इस मिट्टी में मेरे पिता का खून मिला है और उन्नाव पीड़ित का भी। ये खून इस धरती को सींच रहा है। प्रियंका ने कहा- इस देश पर जो अत्याचार हो रहा है, उसे रोकना हमारा कर्तव्य है।
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उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता के घर में परिजनों से बातचीत करती प्रियंका गांधी
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प्रियंका ने अपने संबोधन में कहा- कुछ दिन पहले मैं अवध के एक किसान के घर गई थी। किसान की उम्र पिता राजीव गांधी के बराबर थी। किसान लोहार का काम करते हैं। नोटबंदी के बाद उन्हें काम के लिए दूसरे प्रदेश में जाना पड़ा। इसी दौरान उनकी बेटी के साथ दुष्कर्म हुआ। आरोपी प्रधान का बेटा था। पुलिस ने इस केस की रिपोर्ट लिखने से मना कर दिया। लेकिन लड़की अकेले ही कानूनी लड़ाई लड़ रही थी।
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प्रियंका उन्नाव में दुष्कर्म पीड़िता के घर करीब 30 मिनट तक रूकीं थी
- फोटो : अमर उजाला
प्रधान ने केस वापस लेने के लिए पिता को पीटा। खेत जला दिए और एक दिन बदमाशों ने उन्नाव की उस लड़की को ही बीच सड़क पर जला दिया। वह जलती अवस्था में एक किलोमीटर तक भागी। अंत में गिर गई। लड़की की भाभी जब ये कहानी सुना रही थी तो उसके पिता चेहरा छुपाकर अकेले खड़े रो रहे थे। तभी मुझे अपने पिता की याद आई। प्रियंका ने कहा- इस दृश्य को देखकर मेरी आंखें छलक आई थीं।
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प्रियंका उन्नाव में दुष्कर्म पीड़िता के घर करीब 30 मिनट तक रूकीं थीं
- फोटो : अमर उजाला
ये है पूरा मामला
उन्नाव में गुरुवार को दुष्कर्म पीड़िता पर आरोपियों ने पेट्रोल डालकर उसे जलाकर मारने की कोशिश की थी। इसमें पीड़िता 90 फीसदी जल गई थी। चश्मीदीदों के मुताबिक पीड़िता आग लगने के बाद करीब एक किमी तक मदद की गुहार लगाते हुए दौड़ती रही थी।
परिजनों के हालचाल लेतीं प्रियंका गांधी
- फोटो : अमर उजाला
यहां तक की उसने खुद ही 112 पर फोन कर पुलिस को घटना की जानकारी दी थी, जिसके बाद वहां पुलिस की टीम और एंबुलेंस पहुंची थी। 44 घंटे तक जिंदगी से जंग लड़ने के बाद आखिर में उसकी सांसें थम गईं। रविवार को दुष्कर्म पीड़िता को उन्नाव स्थित उसके गांव में दादी बाबा के पास ही दफनाया गया।