मखाना के दाम 30 प्रतिशत तक दाम बढ़ गए हैं। बजट से पहले 950 रुपये किलो में बिकने वाला मखाना 1300 रुपये किलो में मिल रहा है। कारोबारियों का कहना है कि मांग की तुलना में आपूर्ति कम है। विदेशों में भी इसकी मांग बढ़ रही है। बजट में बोर्ड की घोषणा के बाद इसके दाम तेजी से बढ़े हैं।
नयागंज स्थित किराना बाजार उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी मखाना मंडी है। शहर में प्रतिदिन 1000 बोरी मखाने की खपत होती है। कारोबारी पंकज गुप्ता ने बताया कि आम बजट आने से पहले भाव कुछ तेज थे, लेकिन बजट में मखाना बोर्ड के गठन की घोषणा के बाद से इसके दाम बढ़ते जा रहे हैं।
देश के कुल 90 प्रतिशत मखाना का उत्पादन बिहार में होता है। सरकार का लक्ष्य इसके उत्पादन और बिक्री को बढ़ावा देना है। जिन राज्यों में इसकी मांग नहीं होती थी, वहां के कारोबारी भी बाजार से संपर्क कर रहे हैं। हड्डी, पेट, बीपी, सुगर में लाभ के चलते इसकी मांग बढ़ी है। मुंबई, गुजरात के कारोबारी इसका निर्यात भी करने लगे हैं।
कारोबारी आशीष भगत ने बताया कि मखाना बोर्ड के गठन से इसका न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित हो सकता है। किसानों के साथ ही ट्रेडिंग करने वालों को लाभ मिलेगा और कारोबार संगठित होगा। सरकार की निगरानी से निर्यात और बढ़ सकता है। नई फसल जुलाई में आएगी। फसल अच्छी है, लेकिन मांग और आपूर्ति में अंतर के चलते भाव तेजी से बढ़े हैं।
दि किराना मर्चेंट एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अलंकार ओमर ने बताया कि मांग में अचानक आई तेजी से मखाना के दाम बढ़े हैं। आम बजट के बाद मखाना को लेकर चर्चा तेज हो गई है। जिस तरह 2023-2024 में मिलेट्स की धूम थी, उसी तरह साल 2025 मखाना के लिए रहने का अनुमान जताया जा रहा है।