झींझक पहुंचे राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद
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मैं झींझक की धरती पर हूं। आपका आशीर्वाद लेने आया हूं। इसी धरती ने मुझे राष्ट्रपति भवन तक पहुंचाया। राष्ट्रपति बनने के करीब चार साल बाद शुक्रवार को पहली बार अपने गृह नगर के रेलवे स्टेशन झींझक पहुंचे रामनाथ कोविंद यहां अपनों को देखकर भावुक हो गए। पत्नी सविता कोविंद और बहू गौरी कोविंद के साथ शाम करीब छह बजे उनकी विशेष ट्रेन स्टेशन पहुंची।
मंच पर हाथ हिलाकर परिवारीजनों, संबंधियों और अन्य लोगों का अभिवादन करते हुए वह दोस्तों और झींझक की गलियों में खो गए। राष्ट्रपति ने कहा कि मेरी जन्मभूमि परौंख है। खानपुर में माध्यमिक शिक्षा हुई और फिर यहां से झींझक, कानपुर, दिल्ली, पटना राजभवन और वहां से राष्ट्रपति भवन तक पहुंचा हूं।
उन्होंने कहा कि स्टेशन के पास की गलियां आज भी दिलों में बसी हैं। इसी स्टेशन पर ट्रेन के लिए घंटों इंतजार करते थे। कुछ लोग वहां पर छोड़ने भी आते थे। कहा कि स्टेशन के पास एक मिठाई की दुकान हुआ करती थी। हालांकि, आज विकास की वजह से सब बदल गया है। शायद अब वो गलियां पहचान में भी न आएं।
मेरे कई अपने चले गए, उनको नमन
राष्ट्रपति ने कहा, मैं जहां खड़ा हूं, यहां से कुछ ही दूरी पर मेरे मित्र शुभचिंतक बाबूराम बाजपेई रहते थे। रसूलाबाद में रामविलास त्रिपाठी रहते थे। ये दोनों मेरे अजीज कुछ दिन पहले हमको छोड़कर चले गए। मैं इन दो नामों का सिर्फ जिक्र कर रहा हूं। इसके अलावा मेरे तमाम अपने बिछड़ गए। कुछ आयु की वजह से तो कुछ को कोरोना महामारी ने छीन लिया। इन सभी लोगों से मैंने बहुत कुछ सीखा। उनको आदर्श मानकर जिंदगी जी। मगर आज वो मेरे बीच नहीं हैं। मैं उनको नमन करता हूं और श्रद्धांजलि देता हूं।
प्रोटोकॉल की वजह से दूरी है, दिल से नहीं
राष्ट्रपति अपनों को देखकर शुरू से ही भावुक नजर आए। यहां मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि जिस तरह आप नागरिक हैं, उसी तरह मैं भी हूं। फर्क सिर्फ इतना है कि मैं इस कतार में सबसे आगे हूं, इसलिए देश का प्रथम नागरिक हूं। ये जो दूरी दिख रही है, वो प्रोटोकॉल की वजह से है। दिल से दूरी नहीं है।
राष्ट्रपति ने बताया कैसे बना ट्रेन से आने का प्रोग्राम
राष्ट्रपति ने कहा, पहले झींझक आने का कोई कार्यक्रम नहीं था। मुझे दिल्ली से हेलीकॉप्टर से सीधे कानपुर और वहां से सिर्फ परौख आना था। इस बीच, रेल मंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात हुई। उन्होंने कहा कि झींझक और रूरा रेलवे स्टेशन कानपुर के पास ही हैं। उन्होंने इच्छा जताई कि मैं रेलमार्ग से कानपुर जाऊं और इन स्टेशनों पर रुककर अपने लोगों से मिलूं।
इस दौरान रास्ते भर रेलवे के विकास कार्य भी देख सकूं। तब यहां आना तय हुआ। राष्ट्रपति ने कहा कि रेल मंत्री भी साथ आना चाहते थे, लेकिन मैंने उनको मना कर दिया। वजह यह कि उनकी जिम्मेदारी बहुत है, लेकिन उनके अफसर साथ आए हैं। उन्होंने कहा कि अगर किसी को कोई समस्या या मांग हो तो लिखित में दे सकता है। यहां पर मंत्री, मेरे अफसर और जिले के सभी अधिकारी मौजूद हैं।