चयन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बना सकती है व्यवस्था
आईआईटी परिषद की बैठक में भी इस संबंध पर चर्चा हुई, जिसमें परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, प्रभावी बनाने के उपायों पर जोर दिया गया। विशेषज्ञों के अनुसार न्यू एप्टीट्यूड टेस्ट फॉर्मेट का एक बड़ा लाभ यह भी हो सकता है कि इससे कोचिंग संस्थानों पर निर्भरता कुछ हद तक कम हो सकती है। यह व्यवस्था चयन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बना सकती है। फिलहाल आईआईटी में प्रवेश के लिए दो चरणों की परीक्षा प्रणाली लागू है। पहले चरण में जेईई मेन आयोजित की जाती है, जिसमें देशभर के लाखों छात्र भाग लेते हैं।
विभिन्न निकायों की मंजूरी आवश्यक होगी
इसके बाद शीर्ष लगभग 2.5 लाख रैंक प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों को ही जेईई एडवांस परीक्षा में शामिल होने का अवसर मिलता है। यदि प्रस्तावित न्यू एप्टीट्यूड टेस्ट फॉर्मेट को मंजूरी मिलती है तो जेईई एडवांस का स्वरूप पूरी तरह बदल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की प्रणाली से परीक्षा अधिक लचीली, सुरक्षित और तकनीक आधारित बन सकेगी। हालांकि इसे लागू करने से पहले आईआईटी की प्रवेश प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न निकायों की मंजूरी आवश्यक होगी और इसके लिए पायलट परीक्षण भी किए जा सकते हैं।
समझ का होगा आकलन
न्यू एप्टीट्यूड टेस्ट फॉर्मेट में छात्रों की तार्किक क्षमता, समझ और समस्या समाधान को अधिक महत्व दिया जाएगा। केवल रटकर या फॉर्मूला याद करके सफलता पाना कठिन होगा। हर छात्र को उसकी क्षमता के अनुरूप प्रश्न मिलेंगे, जिससे चयन प्रक्रिया अधिक संतुलित और निष्पक्ष बन सकेगी।
न्यू एप्टीट्यूड टेस्ट फॉर्मेट अभी टेस्टिंग फेज में है। इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शामिल किए जाने की तैयारी है। निश्चित ही छात्रों को इससे लाभ मिलेगा। -प्रो. मणींद्र अग्रवाल, निदेशक आईआईटी कानपुर