एक जिला एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना में होजरी उद्योग को शामिल किए जाने के बाद गुरुवार को पहली बार इस क्षेत्र के उद्यमी आगे की रणनीति बनाने के लिए जुटे। उद्योग विभाग के अफसरों के साथ बैठक कर चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ने की योजना बनी।
तय हुआ कि पहले अपने प्रदेश के बाजार तक उत्पादों की पहुंच सुनिश्चित करेंगे। इसके बाद देश, विदेश में छाने की तैयारी होेगी। प्रमुख होजरी उद्यमी बलराम नरूला ने बताया कि शहर में होजरी उद्योग के लिए अपार संभावनाएं हैं।
इसके लिए हमें अपनी सोच को नए जमाने के हिसाब से आयाम देना होगा। कानपुर का दो हजार करोड़ का होजरी उद्योग प्रदेश में कुल मांग का सिर्फ 20 फीसदी आपूर्ति करता है। करीब 23 करोड़ की आबादी वाले इस राज्य में 80 फीसदी होजरी बाजार पर अन्य राज्यों अथवा विदेशी उत्पादों का कब्जा है।
यदि इस 80 फीसदी बाजार पर कब्जा कर लिया तो देश भर में कानपुर के होजरी उद्योग को प्रमुख केंद्र बनने से कोई रोक नहीं सकता। इसके लिए योजनाबद्ध तरीके से काम और उद्यमियों को तकनीकी कौशल व फंडिंग की व्यवस्था कराई जाए। प्रदेश में रिसर्च एवं डेवलपमेंट पर कोई काम नहीं होता। ऐसे में होजरी के एक्सपर्ट बुलाकर कार्यशाला कराने की भी जरूरत है।
नार्दन इंडिया होजरी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष मनोज बंका ने सुझाव दिया कि होजरी गारमेंट के प्रमुुख उत्पादक राज्यों तमिलनाडु के तिरुपुर और पंजाब के लुधियाना में स्थापित इकाइयों का दौरा करवाया जाए। ताकि पता चल सके कि देश-दुनिया में क्या बदलाव आ रहा है? किस तरीके की मशीनें इस्तेमाल हो रही हैं?
दूसरे उत्पादों की तरफ देना होगा ध्यान होजरी उद्यमी प्रमोद सुराना ने कहा कि कानपुर की पहचान अभी अंडरगारमेंट उत्पादों के तौर पर ही है। जबकि बाजार में होजरी के अन्य उत्पादों की भरमार है। पुरुषों के लिए होजरी की टीशर्ट, लोअर, बरमूडा जैसे उत्पादों से बाजार भरा पड़ा है। महिलाओं के वस्त्रों में भी बड़ा स्कोप है।
लैगिंग होजरी उत्पाद के क्षेत्र में नया इनोवेशन है। लैगिंग का इतना इस्तेमाल होने के बाद भी कानपुर में कुल खपत का एक फीसदी भी उत्पादन नहीं होता। आगे बढ़ने के लिए हमें दूसरे उत्पादों की तरफ ध्यान देना होगा। इसी बाजार को पकड़ लें तो यूपी के कारोबारियों को किसी दूसरे बाजार की जरूरत नहीं होगी।
बुनाई, रंगाई, कटाई, सिलाई पर विशेष ध्यान संयुक्त आयुक्त उद्योग सर्वेश्वर शुक्ल ने उद्यमियों का सुझाव जाना कि वे किस तरह की सहूलियत चाहते हैं। इस पर उद्यमियों ने बताया कि होजरी उत्पाद तैयार करने में चार तरह के प्रमुख काम होते हैं। इसमें कपड़े की बुनाई (निटिंग), रंगाई (प्रोसेसिंग), डिजाइन तैयार करना (कटिंग) और सिलाई करना (स्टिचिंग) शामिल है।
इन कामों में कुशलता के लिए ट्रेनिंग प्रोग्राम चलने चाहिए। जो व्यक्ति जिस तरह का काम कर रहा है उसमें उसे विशेषज्ञता दिलाई जाए। जब तक बेहतर कटिंग नहीं होगी, तब तक पहनने वाले को अच्छी फिटिंग नहीं आएगी। इसके चलते तमाम उत्पाद फेल हो गए।
संयुक्त आयुक्त ने मई के अंत तक विशेषज्ञों की टीम बनाकर कार्यशालाएं शुरू कराने का भरोसा दिया। इसके लिए तकनीकी संस्थानों को नॉलेज पार्टनर के तौर पर जोड़ने का काम भी शुरू हो गया है। बैठक में उपायुक्त उद्योग सूर्य प्रकाश यादव, मोहित चावला, दीपक इलानी, गुंजन यादव, राजेश गुप्ता, चेतन मालपानी शामिल रहे।