चित्रकूट स्वास्थ्य विभाग की जननी सुरक्षा योजना की बृहस्पतिवार को फिर पोल खुल गई। मुख्यालय से लेकर मानिकपुर तक के अस्पतालों में दर्द से दो प्रसूताएं कराहती रहीं, पर बिना सुविधा शुल्क दिए स्टाफ और डाक्टरों ने भर्ती नहीं किया और रेफर कर दिया। यहां प्रसूताओं के परिजन एंबुलेंस के लिए आधे घंटे तक माथापच्ची करते रहे और आखिर में निजी वाहन से जिला अस्पताल ले जाने लगे।
इस बीच एक प्रसूता ने रास्ते में बच्चे को जन्म दे दिया, पर कुछ देर बाद ही नवजात की मौत हो गई, जबकि दूसरे को निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मानिकपुर कस्बे के शिवनगर निवासी खुर्शीद की पत्नी को प्रसव पीड़ा होने पर दोपहर पौने एक बजे मानिकपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) लेकर आए।
गर्भवती को भर्ती करने के लिए स्टाफ ने तीन हजार रुपये की मांग की
काफी देर तक प्रसूता को स्टाफ ने हाथ तक नहीं लगाया। इस बीच दर्द से कराहती प्रसूता कई बाद बेहोश भी हुई। खुर्शीद का आरोप है कि स्टाफ ने तीन हजार रुपये की मांग की और न देने से बिना भर्ती किए जिला अस्पताल रेफर कर दिया। बताया कि एंबुलेंस न मिलने से आधे घंटे बाद पत्नी को निजी वाहन से जिला अस्पताल ले जा रहा था, पर रास्ते में ही नवजात का जन्म हुआ।
यहां बच्चे की हालत खराब होने पर फिर वापस सीएचसी लेकर आए, पर फिर जिला अस्पताल को दोबारा रेफर कर दिया गया। यहां से जिला अस्पताल लाते वक्त रास्ते में नवजात की मौत हो गई। उधर, सीएचसी प्रभारी डा. राजेश कुमार का कहना है कि मामले की जानकारी काफी देर बाद मिली। कहा कि ड्यूटी पर तैनात स्टाफ से पूछताछ की जा रही है।
एंबुलेंस न मिलने से निजी वाहन से प्रसूता ने रास्ते में दिया बच्चे को जन्म
मामले में जो भी दोषी होगा, सख्त कार्रवाई की जाएगी। उधर, पहाड़ी थाना क्षेत्र के कहेटा निवासी रामसरन की गर्भवती पत्नी सोनिया देवी को दोपहर तेज दर्द होने पर परिजन पहाड़ी सीएचसी लाए, जहां से प्रसूता को जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। रामसरन का आरोप है कि अस्पताल स्टाफ ने दो हजार रुपये की मांग की और न देने पर इलाज करने से मना कर दिया।
यहां से प्रसूता को दूसरी जगह के लिए रेफर कर दिया गया। यहां पर एंबुलेंस न मिलने से निजी वाहन से प्रसूता को जानकीकुंड अस्पताल लेकर आए और भर्ती कराया। उधर, सीएमएस डा. एसएन मिश्रा का कहना है कि मामले में किसी ने शिकायत नहीं की है। शिकायत मिलने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।