जालौन में प्रसव के लिए सीएचसी पहुंची महिला की मौत हो गई। इस पर परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। परिजन करीब तीन घंटे तक शव लेकर अस्पताल में ही डटे रहे। काफी देर बाद पहुंची पुलिस ने जब तहरीर ली, तब जाकर परिजनों ने शव हटने दिया। कोतवाल ललितेश का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
बता दें कि घटना से कुछ देर पहले ही लखनऊ से आई टीम ने इसी सीएचसी में टीबी के मरीजों के इलाज की प्रगति भी जांची थी। कोंच तहसील के ग्राम करयावली निवासी विष्णु अहिरवार ने बुधवार की सुबह नौ बजे अपनी पत्नी दिलासा (24) को सीएचसी कोंच में भर्ती कराया था।
दिलासा को प्रसव होना था। उसकी सारी जांचें की गईं जो सामान्य निकलीं लेकिन दोपहर दो बजे के आसपास उसकी अचानक तबियत बिगड़ गई तो डॉक्टरों ने उसे उरई ले जाने की सलाह दी। परिजनों का आरोप है कि इसी बीच स्टाफ नर्सों ने विष्णु से कहा कि दस हजार रुपया खर्च होगा, डिलीवरी यहीं करा देंगे।
इस पर दिलासा के परिजन राजी हो गए और नर्सें दिलासा को प्रसव कक्ष में ले गईं जहां करीब शाम चार बजे के आसपास संदिग्ध हालात में उसकी मौत हो गई। पत्नी की इस तरह मौत हो जाने से आहत उसका पति विष्णु वहीं गश खाकर गिर पड़ा। दिलासा के साथ आए परिजनों और रिश्तेदारों को जब उसकी मौत का पता लगा तो उन्होंने हंगामा काटना शुरू कर दिया।
उन्होंने इस पूरे मामले में लापरवाही का आरोप लगाया है। मृतका का शव सीएचसी में ही रखा था और परिजन कोतवाली पहुंच गए हैं। परिजनों के मुताबिक दिलासा और विष्णु की शादी छह साल पहले हुई थी और उनके दो बेटियां भी हैं। इस बाबत सीएचसी प्रभारी डॉ. आरके शुक्ला का कहना है कि रुपयों की मांग की बात गलत है।
परिजनों ने ही विनती कर प्रसव कराने के लिए कहा था। फिर भी जांच की जाएगी। यदि कोई दोषी पाया गया तो कार्रवाई भी की जाएगी। वहीं, कोतवाल का कहना है कि परिजनों ने स्टाफ नर्सों के खिलाफ तहरीर दी है। लिहाजा जांच कर कार्रवाई की जाएगी। वहीं, दिलासा के ससुरालियों का कहना है कि अस्पताल प्रबंधन ने उनकी सारी खुशियां छीन ली।