कानपुर। दुनिया के कई देशों के बीच चल रही जंग के खत्म होने और चारों ओर शांति कायम रखने के लिए अलविदा जुमे की नमाज के बाद मस्जिदों में शुक्रवार को दुआएं की गईं। बेकनगंज, चमनगंज, कर्नलगंज, बाबूपुरवा, जूही, मछरिया, रावतपुर, रोशननगर, जाजमऊ और रामादेवी की मस्जिदों में नमाज हुई। यहां युद्ध प्रभावित देशों के लोगों के परिजनों के लिए दुआ की गई। जिन मस्जिदों में ज्यादा भीड़ थी वहां दो बार नमाज पढ़ी गई।
बांसमंडी स्थित जामा मस्जिद में शहरकाजी मुफ्ती साकिब अदीब मिस्बाही ने रमजान में किए गए अच्छे काम जारी रखने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि अगर 19 मार्च को ईद का चांद नजर नहीं आया तो 20 मार्च को फिर से अलविदा जुमा की नमाज पढ़ी जाएगी। अशरफाबाद स्थित जामा मस्जिद में मौलाना अमीनुल हक अब्दुल्लाह कासमी ने कहा कि रोजों का असली मकसद इंसान में परहेजगारी पैदा करना है। उन्होंने माता-पिता से अपील करते हुए कहा कि वे अपनी औलाद की इबादत और दीनदारी पर ध्यान दें। मौलाना कासमी ने कहा कि मालदार और कारोबारी अपनी दौलत का इस्तेमाल केवल निजी सुख-सुविधा तक सीमित न रखें, बल्कि कौम की भलाई के लिए स्कूल, कोचिंग सेंटर और अस्पताल स्थापित करें।