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Kanpur: प्रताप प्रेस के भवन को पुरातन इमारत घोषित किया जाए, प्रतिमा दोबारा स्थापित करने की भी मांग

Wed, 26 Mar 2025 04:10 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur News: गणेश शंकर विद्यार्थी ने कानपुर करेंसी में छह फरवरी से 20 नवंबर 1908 तक 30 रुपये माह पर नौकरी की। कार्य के दौरान किताब पढ़ने पर अफसर ने उन्हें डांट दिया था। इस पर उन्होंने सेवा से त्यागपत्र दे दिया था।
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गणेश शंकर विद्यार्थी का बलिदान दिवस - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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कानपुर इतिहास समिति की ओर से गणेश शंकर विद्यार्थी के बलिदान दिवस पर चौबेगोला स्थित बंदूकेश्वर मंदिर पर दीपदान कर श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। महासचिव अनूप शुक्ला ने कहा कि भगत सिंह की फांसी के बाद जब कानपुर में दंगा हो गया था। तब शहर में सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए गणेश शंकर विद्यार्थी इसी स्थान पर बलिदान हो गए थे। शांतनु चैतन्य ने कहा कि गणेश शंकर विद्यार्थी का जीवन प्रताप प्रेस और शहादत स्थल हमारा तीर्थ है।

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प्रताप प्रेस को हेरिटेज बिल्डिंग घोषित किया जाए। क्रांति कुमार कटियार ने कहा कि प्रताप प्रेस आजादी की लड़ाई में दोनों विचारधाराओं का केंद्र था। यहां चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह, सुरेशचंद्र भट्टाचार्य सभी जुड़े थे। आलोक श्रीवास्तव ने कहा कि गणेश शंकर विद्यार्थी ने कानपुर करेंसी में छह फरवरी से 20 नवंबर 1908 तक 30 रुपये माह पर नौकरी की। कार्य के दौरान किताब पढ़ने पर अफसर ने उन्हें डांट दिया था। इस पर उन्होंने सेवा से त्यागपत्र दे दिया था। यहां धर्म प्रकाश गुप्त, देव कबीर, विनोद टंडन, विजय गुप्त, हर्षित सिंह, वैभव मिश्र, कृपेश , कुणाल सिंह वंश चौरसिया आदि उपस्थित रहे।

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गणेश शंकर विद्यार्थी की प्रतिमा दोबारा स्थापित करने की मांग
अमर बलिदानी गणेश शंकर विद्यार्थी के बलिदान दिवस पर मंगलवार को एक गोष्ठी का आयोजन परेड चौराहे के पास किया गया। यह आयोजन प्रताप वैश्विक शोध संस्थान की ओर से किया गया। गोष्ठी की शुरुआत गणेश शंकर विद्यार्थी के चित्र पर माल्यार्पण कर की गई। अध्यक्षता करते हुए शिक्षाविद सुधांशु त्रिपाठी ने कहा कि विद्यार्थी जी ने प्रताप नारायण मिश्र व महावीर प्रसाद द्विवेदी के सानिध्य में रहकर उच्च कोटि के पत्रकार व राष्ट्र भक्त बनने का काम किया। समाजसेवी व कांग्रेस के पूर्व कार्यवाहक अध्यक्ष कृपेश त्रिपाठी ने नरौना चौराहे पर मेट्रो परियोजना के तहत गणेश शंकर विद्यार्थी की प्रतिमा हटाने पर रोष व्यक्त किया। वरिष्ठ छात्र नेता उमेश शुक्ला ने गोष्ठी का संचालन किया। इस दौरान विजय गुप्त, शांतनु त्रिपाठी, मुकेश श्रीवास्तव, अतुल सक्सेना, डॉ. संजय भारती, अरुण पांडेय, कानपुर विवि के पूर्व महामंत्री श्याम दीक्षित आदि मौजूद रहे।

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