कानपुर। रेल मंत्री ने बजट में जो घोषणाएं की हैं, उन पर अमल हो जाए तो किसी हद तक तस्वीर बदल सकती है। जरूरी यह भी है कि काम तय समय पर हों और यात्रियों को समय पर जरूरी सूचनाएं मिलती रहीं। कहने को तो कानपुर सेंट्रल स्टेशन वर्ल्ड क्लास स्टेशनों की सूची में है पर वर्तमान में यहां सुविधाएं थर्ड क्लास जैसी हैं। स्टेशन पर सिटी साइड और कैंट साइड में पूछताछ काउंटर हैं लेकिन यात्रियों को सही सूचना देने वाला कोई नहीं मिलता। सिटी साइड में टिकट काउंटर तो 20 हैं लेकिन टिकट सिर्फ तीन, चार पर मिलता है। पानी की दिक्कत ऐसी कि ट्रेन रुकते ही यात्री पानी के लिए दौड़ लगाता है। पेयजल बूथ पहुंचने पर हवा देती टोटियां ही मिलती हैं। मजबूरन यात्री को वेंडर से पानी खरीदना पड़ता है। टॉयलेट का हाल ऐसा कि गंदगी के कारण उसमें घुसने का मन न करे। उस पर भीड़ इतनी कि एक के पीछे एक की लाइन रहती है। प्लेटफार्मों पर यात्रियों के बीच आवारा जानवर अक्सर गंदगी करते घूमते रहते हैं। सेंट्रल पर लगे सीसीटीवी कैमरे आधे से ज्यादा बंद रहते हैं।
सीन-1 सिटी साइड पूछताछ काउंटर
दोपहर एक बजे यात्री कमला सिंह पूछताछ काउंटर पर इलाहाबाद जाने वाली ट्रेन का समय पूछती हैं। कर्मी कोई जवाब नहीं देता। इस पर वह कहती हैं, भैया कम से कम यह बतो दो कि कहां पर आ रही है...। ऐसी ही आवाजें काउंटर पर गूंजती रहीं। भीड़ के कारण लोग एक दूसरे के ऊपर चढ़े जा रहे हैं। बुजुर्ग भीड़ देखकर अंदर घुसने की हिम्मत ही नहीं जुटा पा रहे थे। बाबू बोर्ड की तरफ उंगली उठाकर यात्रियों को बस पढ़ने का इशारा करता रहा।
सीन दो- सिटी साइट जनरल टिकट काउंटर
यात्रियों की सुविधा के लिए यहां 20 टिकट काउंटर हैं लेकिन यात्रियों को टिकट सिर्फ काउंटर नंबर 17,18,19, 20 पर ही दिए जा रहे हैं। लाइन में पीछे खड़ा एक यात्री आगे वाले से लगातार कह रहा था कि यार जल्दी टिकट ले लो ट्रेन आने वाली....। आगे वाला बोला, भाई जी क्या करें लाइन से ही तो मिलेगा...। अंदर बैठा कर्मचारी इतना धीमे काम रहा है कि टिकट कल तक दे पाएगा..। तभी ट्रेन आने की घोषणा हो गई। दोनों यह कहते हुए लाइन से हट गए कि चलो, टीटी से मिलकर ही कुछ बात बनाएंगे...।
सीन-तीन- प्लेटफार्म नंबर एक पर पंखे बंद
गर्मी ने अपनी रफ्तार पकड़ ली है लेकिन रेलवे कर्मचारी अपनी नियमावली के अनुसार ही काम करेंगे। प्लेटफार्म नंबर एक पर अपनी ट्रेन के इंतजार में बैठे यात्रियों के माथे पर पसीना टपक रहा है लेकिन वहां लगे पंखे शो पीस बने हैं।
सीन-चार- चार मोबाइल चार्ज कर लो भाई
लोकमान्य तिलक ट्रेन से मुंबई की यात्रा करने वाले यात्री स्टेशन पर बने मोबाइल चार्जिंग प्वाइंट में लाइन से खड़े हैं। एक हट रहा है तो दूसरा अपना चार्जर लगा देता है। यात्रियों का कहना है कि यहीं से मोबाइल की बैट्री फुल कर लें वरना जनरल डब्बे में घुसना भी मुश्किल काम है, मोबाइल कैसे चार्ज कर पाएंगे।
सीन-पांच- प्लेटफार्म पर पानी का संकट शुरू
दोपहर दो बजे प्लेटफार्म नंबर एक पर मुंबई जाने के लिए लोकमान्य तिलक ट्रेन खड़ी हुई। गर्मी से बेहाल यात्री पानी के कोच से बाहर निकले। पेयजल बूथ पर यात्रियों का जमावड़ा लग गया। भीड़ अधिक होने और टोटियां कम होने से कुछ लोग ही पानी भर सके। कुछ यात्रियों को मजबूरन वेंडर से पानी की बोतल खरीदनी पड़ी। पानी लेने वाले यात्री विकास का कहना है कि ट्रेन में बच्चे प्यासे हैं, भीड़ इतनी है, कब तक खड़े रहें।
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ये हो तो बदले कानपुर सेंट्रल की तस्वीर
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पूछताछ काउंटर की संख्या बढ़े
सेंट्रल स्टेशन पर सिटी साइड व कैंट साइड पर एक-एक पूछताछ काउंटर बना है। इसमें दिनभर यात्रियों की भीड़ जमा रहती है। अक्सर इन काउंटरों पर कर्मचारी नदारद रहते है। जिसके चलते यात्रियों को ट्रेन का समय पता करने के लिए भटकना पड़ता है। यदि काउंटरों की संख्या बढ़ा दी जाए और कर्मचारी मौजूद रहे तो यात्रियों को काफी सहूलियत हो जाएंगी।
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जनरल टिकट काउंटरों की संख्या बढ़े
कहने को तो सेंट्रल पर कैंट और सिटी साइड मिलाकर कुल 10 जनरल टिकट काउंटर होंगे। पर इनमें चलते सिर्फ 7 ही होंगे। अक्सर तीन से चार काउंटर कर्मचारियों की कमी के चलते बंद रहते है। जिसकेचलते यात्रियों की टिकट लेने को घंटों लाइन लगानी पड़ती है। यदि सेंट्रल पर करीब 15 काउंटर हो जाए तो उनमें रेलवे कर्मचारी बैठे तो टिकट खरीदने की मारामारी बंद हो जाएगी। वैसे भी एक शिफ्ट में करीब 4500 से 5000 जनरल टिकट बिकते है।
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पंखों की संख्या बढ़ाई जाए
स्टेशन पर अंग्रेजों की हुकूमत आज भी चल रही है। इस बार फरवरी महीने में गर्मी पड़ने लगी है। पर रेलवे में पंखे और वाटरकूलर 15 अप्रैल को चालू होंगे। पिछले साल अमर उजाला की खबर पर रेलवे को एक अप्रैल में पंखे और वाटरकूलर चलाने पड़े थे। यात्रियों की सुविधाओं को देखते हुए गर्मी शुरू होते ही पंखे और वाटरकूलर चला दिए जाए तो अच्छा होगा। साथ ही प्लेटफार्म नंबर 2,3, 8 व 9 में पंखों की संख्या बढ़ा दी जाए।
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मोबाइल चार्जरों की संख्या बढ़े
सेंट्रल पर एक मात्र मोबाइल चार्जर प्लेटफार्म नंबर पर डिप्टी एसएस कामर्शियल कार्यालय के पास लगा हुआ है। जिसमें प्रतिदिन सैकड़ों यात्री अपने-अपने मोबाइल चार्ज करते हैं। यदि प्रत्येक प्लेटफार्म पर मोबाइल चार्जर की संख्या बढ़ जाए तो यात्री अपने-अपने मोबाइल आसानी से चार्ज कर सकते है। वैसे भी वर्तमान समय में मोबाइल के बिना लोगों की जिंदगी अधूरी लगती है।
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पानी के नलों की संख्या बढ़े
सेंट्रल स्टेशन में एक से नौ प्लेटफार्म तक 17 वाटरकूलर लगे है। जबकि प्रत्येक प्लेटफार्म पर सादे पानी के नलों की टोटियां है। प्रतिदिन करीब डेढ़ लाख यात्रियों की आवाजाही स्टेशन पर होती है। यदि वाटरकूलर और टोटियों की संख्या बढ़ा दी जाए तो यात्रियों के पीने की पानी की समस्या दुरुस्त हो जाएगी। इसकेलिए कई बार स्टेशन अधीक्षक ने अधिकारियों को लिखा भी है।
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सफाई को जेट मशीन की संख्या बढ़े
दस प्लेटफार्मों को साफ करने की जिम्मेदारी सिर्फ तीन जेट मशीनों की है। यदि इनकी संख्या बढ़ाकर 20 हो जाए। साथ ही बैटरी चलित कूड़ा उठाने वाली 10 गाड़ियां आ जाए तो कानपुर सेंट्रल स्टेशन वाकई वर्ल्ड क्लास हो सकता है। क्योंकि जब तीन जेट मशीनों में सेंट्रल चमक रहा तो इनके मिलने पर वाकई कमाल हो सकता है।
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सीसीटीवी कैमरों की संख्या बढ़ाई जाए
प्रतिदिन सेंट्रल स्टेशन पर जीआरपी में कोई न कोई चोर पकड़ा या गिरोह पकड़ा जाता है। वर्तमान में आरपीएफ व जीआरपी थाने के अलावा आरक्षण काउंटर में सीसीटीवी कैमरे लगे है। यदि जनरल टिकट काउंटरों और प्लेटफार्मों पर सीसीटीवी कैमरों की संख्या बढ़ा दी जाए। तो रेलवे में होने वाले अपराधों की संख्या में कमी हो सकती है।
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उपचार की सुविधा नहीं
अक्सर ट्रेनों में यात्री की तबीयत खराब होने पर लोको अस्पताल से डाक्टर को बुलाया जाता है। यदि डिप्टी एसएस कामर्शियल आफिस में फर्स्ट ऐड बाक्स में आवश्यक दवाएं और पट्टी रख दी जाए तो चोट-खरोच, बुखार आदि पर यात्री का इलाज मौके पर ही किया जा सकता है।