पालिटेक्निक की प्रवेश परीक्षा में शामिल परीक्षार्थी (फाइल फोटो)
देशभर के इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (आईटीआई) में नए सत्र से गरीब सवर्ण आरक्षण लागू कर दिया जाएगा। हालांकि इसके बावजूद राजकीय आईटीआई में सीटों की संख्या में कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा। निजी आईटीआई में जरूर करीब एक लाख पांच हजार सीटें बढ़ जाएंगी।
डायरेक्टर जनरल ऑफ ट्रेनिंग ने इस आरक्षण को लागू करने का नया तरीका खोज निकाला है। तय किया है कि अभी तक देशभर में लागू 30 प्रतिशत सुपरन्यूमरेरी कोटे को खत्म कर दिया जाएगा और इसकी जगह गरीब सवर्ण आरक्षण लागू होगा। मतलब कोटे की संख्या पहले की तरह 30 प्रतिशत ही होगी, बस कुछ बदलेगा तो वह कोटे का नाम।
बार-बार नहीं बढ़ानी पड़ेंगी सीटें
इस बाबत शुक्रवार को आदेश भी जारी कर दिया गया। यही नहीं दिव्यांग आरक्षण में भी एक प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। इसे भी निर्धारित 30 प्रतिशत कोटे के तहत ही शामिल किया गया है। अभी तक दिव्यांग आरक्षण तीन प्रतिशत था जो बढ़ाकर चार प्रतिशत कर दिया गया है।
राजकीय आईटीआई पांडुनगर के प्रिंसिपल ई. केएम सिंह ने बताया कि अभी तक आईटीआई संस्थानों में 30 प्रतिशत सुपरन्यूमरेरी कोटे की सीटें बढ़ाई जा सकती थीं। इस कोटे के तहत उन छात्रों को दाखिला दिया जाता था जो मेरिट में तो आते थे लेकिन त्रुटिवश उनके नाम छूट जाते थे।
परीक्षाओं को किया गया ऑनलाइन
हालांकि लगभग सभी सरकारी आईटीआई में हर साल 30 प्रतिशत सुपरन्यूमरेरी कोटे का प्रयोग होता था। अब ये 30 प्रतिशत सीटें निर्धारित सीटों में जुड़ जाएंगी। मसलन आईटीआई पांडुनगर में अभी तक 2600 सीटें थीं और हर साल अलग से 30 प्रतिशत सुपरन्यूमरेरी कोटे की सीटें मिलाकर करीब 3400 सीटों पर दाखिला दिया जाता था। लेकिन अब पूरी तरह से 3400 सीटें हो जाएंगी। हर साल सीटें बढ़ाने के लिए अनुमति लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
आईटीआई संस्थानों में अब वार्षिक परीक्षाएं भी ऑनलाइन होंगी। इसी सत्र से इसे लागू कर दिया गया है। राजकीय आईटीआई पांडुनगर के प्रिंसिपल ई. केएम सिंह ने बताया कि आखिरी वर्ष में अध्ययनरत छात्रों को छोड़कर बाकी सभी छात्रों को ऑनलाइन ही परीक्षा देनी होगी। परीक्षा केंद्रों का निर्धारण डायरेक्ट जनरल ट्रेनिंग कार्यालय से किया जाएगा। बताया कि ड्राइंग की परीक्षाओं को ऑफलाइन ही आयोजित कराया जाएगा।