दिलेरी, जांबाजी और अपने स्वभाव के चलते करण गांव के दोस्तों व ग्रामीणों में लायंस नायक करण सिंह यादव काफी लोकप्रिय थे। जब भी छुट्टी पर आते तो गांव वालों से बड़े प्यार से बात करते। सेना की कई रोचक किस्से भी वह ग्रामीणों-पड़ोसियों को बताते थे
देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए चौबेपुर के भाऊपुर गांव निवासी एक वीर सपूत ने अपनी प्राणों की आहूति दी है। आतंक मुठभेड़ में भाऊपुर गांव निवासी सैनिक करण सिंह यादव के शहीद होने की सूचना मिलते ही परिजन ही नहीं बल्कि आसपास गांवों के हजारों लोगों का तांता पीड़ित परिवारवालों के साथ ढांढस बधाने के लिए उमड़ा हुआ है।
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वहीं सेना और जिला प्रशासन के अधिकारी भी पीड़ित परिवार को सांत्वना देने के लिए पहुंच रहे हैं। उप जिलाधिकारी बिल्हौर रश्मी लांबा और तहसीलदार तिमराज सिंह ने बताया कि चौबेपुर भाऊपुर गांव निवासी बाबू लाल के 30 वर्षीय करण सिंह यादव जम्मू कश्मीर के पुंछ सेक्टर में 48 आरआर बटालियन में लायंस नायक के पद पर तैनात थे।
प्रारंभिक सूचना के अनुसार, बीते दिनों सीमा की सुरक्षा करते समय आतंकियों के हमले में सेना के पांच जवानों का बलिदान हुआ। उसमें से क्षेत्र के करण सिंह यादव भी शामिल हैं। पिता बाबूलाल ने बताया कि पुत्र करण सिंह शुरू से ही देश की सेवा के लिए मन बना चुका था। पढ़ाई करते हुए उसने कड़ी मेहनत कर वर्ष 2013 में सेना में नौकरी पाई।
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करण की शादी करीब छह साल पहले अंजू से हुई। करण के एक पुत्री पांच वर्षीय आर्या और डेढ साल का पुत्र आयुष है। बहू लाल बग्ला, कानपुर में रहकर आर्या को सैनिक स्कूल में पढ़ाती है। पति के बलिदान की खबर सुनकर अंजू भी भाऊपुर गांव पहुंच गई है।
वहीं, अगस्त 2023 में करण रक्षाबंधन पर्व पर घर आया था तब उसने फरवरी 2023 में घर आने की बात कही थी, लेकिन बेटा तो नहीं आया, उसकी शहादत की सूचना जरूर आ गई। उधर, करण के शहीद होने की जानकारी पर अधिकारियों समेत सेना से जुड़े अफसरों, राजनैतिक दलों के पदाधिकारियों सहित नाते रिश्तेदारों का पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाने के लिए आना लगातार जारी है।
शहीद सैनिक करण के छोटे भाई अरुण यादव ने बताया कि भाई देश सेवा के लिए उसे भी प्रेरित करते थे, वह भी सेना में जाने के लिए तैयारी कर रहे हैं। शहादत की खबर मिली है, परिवार ही नहीं पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। घरवाले बेटे के आखिरी वादे को याद कर-करके बिलख रहे हैं। वहीं, परिवार को बताया गया है कि करण का पार्थिव शरीर दोपहर तक गांव पहुंच सकता है।
परिजनों को 50 लाख की आर्थिक मदद देगी सरकार
प्रदेश सरकार ने करण कुमार के परिवार को 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता के साथ ही परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की है। साथ ही जिले की एक सड़क का नामकरण करण के नाम पर होगा। देर रात करण के घर पहुंचकर कैबिनेट मंत्री राकेश सचान ने मुख्यमंत्री का भेजा हुआ संदेश परिजनों को सुनाया। राज्यमंत्री प्रतिभा शुक्ला, अजीत पाल आदि शोक संवेदनाएं व्यक्त करने पहुंचे।
करण के आने का परिवार के साथ पड़ोसियों को रहता था इंतजार
दिलेरी, जांबाजी और अपने स्वभाव के चलते करण गांव के दोस्तों व ग्रामीणों में लायंस नायक करण सिंह यादव काफी लोकप्रिय थे। जब भी छुट्टी पर आते तो गांव वालों से बड़े प्यार से बात करते। सेना की कई रोचक किस्से भी वह ग्रामीणों-पड़ोसियों को बताते थे, साथ ही पिता बाबूलाल, भाई अरुण के साथ खेतों पर भरपूर काम करने के साथ ही सभी को घुमाने के लिए कानपुर और बाजार से खरीददारी करवाने ले जाते थे। इसलिए करण सिंह के आने का इंतजार सिर्फ परिवार के लोगों को ही नहीं बल्कि गांव के पड़ोसियों को भी रहता था।
बच्चों को सेना में अधिकारी बनाने की इच्छा रखते थे लायंस नायक करण
शहीद करण यादव अपने बच्चों को भी फौज में अधिकारी बनना चाहते थे, उनके एक बेटा आयुष डेढ़ वर्ष वएक बेटी आर्या 6 वर्ष जो लाल बंगला में किराए के मकान में रहते हैं। बिटिया को सैनिक स्कूल में पढ़ती है। पत्नी अंजू ने बताया कि उनका सपना था कि उनका बेटा सेना में बड़ा अधिकारी बने।
भाई के शहीद होने पर बहनें व्याकुल
शहीद होने की खबर पर पूरे परिवार में कोहराम मचा हुआ है। अगस्त में रक्षाबंधन पर तीन बहनों साधना, जिनकी शादी हो चुकी है और आराधना व सोनम अविवाहित है ने भाई के हाथों में राखी बांधी थी। उन्हें क्या पता कि था कि अगले रक्षाबंधन में दोबारा राखी नहीं बाध पाएंगी।