कानपुर। आधुनिक तकनीक जहां एक ओर जीवन को सहज बना रही है वहीं दूसरी ओर अपराधी हर रोज नए तरीके से वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। ऐसे में अपराधों की जांच और अपराधियों की पहचान के लिए अब पॉलिटेक्निक संस्थान भी फॉरेंसिक एक्सपर्ट तैयार करेंगे।
प्राविधिक शिक्षा विभाग की पहल पर भारतीय शोध एवं विकास संस्थान (आईआरडीटी) ने इस दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए नया पाठ्यक्रम तैयार किया है। यह कोर्स नए सत्र 2026 से लागू होगा। अभी तक अनुसंधान संस्थान ही फॉरेंसिक एक्सपर्ट की डिग्री प्रदान करते थे।
अब पहली बार पॉलिटेक्निक संस्थानों में साइबर फॉरेंसिक एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी कोर्स शुरू किया जा रहा है। एक वर्ष के डिप्लोमा कोर्स से छात्रों को साइबर अपराध, डिजिटल सबूतों की जांच और नेटवर्क सिक्योरिटी जैसे विषयों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण मिलेगा।
आईआरडीटी के सहायक प्राचार्य गौरव किशोर कनौजिया ने बताया कि यह कोर्स कंप्यूटर साइंस, इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, वेब डिजाइनिंग और कंप्यूटर हार्डवेयर एंड नेटवर्किंग ट्रेड के छात्रों को पढ़ाया जाएगा। शुरुआती चरण में छात्रों को डिजिटल फॉरेंसिक की मूल जानकारी, रेटिना जांच और फिंगरप्रिंट विश्लेषण जैसी बारीक तकनीक सिखाई जाएगी।
एक्सपर्ट लेंगे क्लास, देंगे टिप्स
अपराध से जुड़े मामलों को तकनीक के नजरिए से समझाने के लिए विशेषज्ञों की मदद ली जाएगी। फॉरेंसिक एक्सपर्ट सप्ताह में एक बार संस्थान पहुंचकर छात्रों को प्रशिक्षण देंगे और अनुभव साझा करेंगे। वह अपराध की जांच में इस्तेमाल होने वाली आधुनिक तकनीक और डिजिटल सबूतों के विश्लेषण के तरीके बताएंगे, ताकि छात्र व्यावहारिक दृष्टिकोण से इन्हें सीख सकें।
यह पाठ्यक्रम तकनीकी शिक्षा को रोजगारपरक बनाने की दिशा में अहम कदम है। इसे नए सत्र से शुरू किया जाएगा। डिजिटल फॉरेंसिक आज के दौर की आवश्यकता है। साइबर अपराधों की जांच में प्रशिक्षित युवाओं की भारी मांग है, और यह कोर्स उस कमी को पूरा करेगा।फजल रहमान खान, निदेशक, आईआरडीटी