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रिजल्ट पर सियासत, रिजल्ट न जारी होने पर सेल्फ फाइनेंस डिग्री कॉलेज एसोसिएशन ने दी चेतावनी

Mon, 03 Jun 2019 02:11 PM IST
प्रशांत कुमार एजूकेशन डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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आधे-अधूरे घोषित हो रहे रिजल्ट के मामले में सियासत शुरू हो गई है। उत्तर प्रदेश सेल्फ फाइनेंस डिग्री कॉलेज ने फिर से पलटी मारते हुए सोमवार से कानपुर शहर में घूमकर सांकेतिक अनशन करने का एलान किया है। रिजल्ट जारी न होने से लाखों छात्रों का भविष्य अधर में लटका है। फाइनल एग्जाम दे चुके छात्र परास्नातक में एडमिशन नहीं ले पा रहे हैं। बड़ी संख्या में छात्रों को बीएड काउंसलिंग की चिंता भी सता रही है। छात्रों को कहना है कि अगर समय से रिजल्ट जारी नहीं हुआ और फिर मार्कशीट नहीं मिली तो बीएड में दाखिला नहीं मिल पाएगा।

 

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रिजल्ट जारी न होने के चलते बीते बुधवार को उत्तर प्रदेश सेल्फ फाइनेंस डिग्री कॉलेज एसोसिएशन के अध्यक्ष विनय त्रिवेदी ने विश्वविद्यालय को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था। कहा था कि अगर इस बीच रुके हुए रिजल्ट जारी नहीं हुए तो अनशन किया जाएगा। शनिवार को चेतावनी की तिथि समाप्त हुई तो एसोसिएशन नर्म पड़ गया। रजिस्ट्रार डॉ. विनोद कुमार सिंह से मुलाकात करने के बाद विनय त्रिवेदी ने दावा किया कि उनकी चेतावनी के चलते ही 48 घंटों में 348 कॉलेजों के रुके हुए परिणाम जारी कर दिए गए जिसे विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी झूठा करार दे दिया।

 

अब एक दिन बाद ही फिर से एसोसिएशन के अध्यक्ष विनय त्रिवेदी ने एलान किया है कि वह सोमवार से सांकेतिक अनशन करेंगे। बताया कि वह एक जगह बैठकर अनशन नहीं करेंगे बल्कि अपने काम के साथ शहर में घूमकर अनशन जारी रखेंगे। मतलब महाविद्यालय जाएंगे, विश्वविद्यालय जाएंगे, व्यक्तिगत काम करेंगे। इस पर छात्रों ने सवाल खड़ा किया कि इस अनशन की सच्चाई कैसे लोगों को मालूम चलेगी।

रजिस्ट्रार डॉ. विनोद कुमार सिंह ने करीब 500 डिग्री कॉलेजों को नोटिस जारी करते हुए मौखिक परीक्षा की अंकतालिका विश्वविद्यालय में जमा करने को कहा है। रजिस्ट्रार डॉ. विनोद कुमार सिंह ने कहा कि अंकतालिका उपलब्ध न होने के कारण परीक्षा परिणाम जारी करने में लेटलतीफी हो रही है। इसलिए जिन कॉलेजों ने अब तक मौखिक परीक्षा या प्रैक्टिकल की अंकतालिका विवि के गोपनीय विभाग में उपलब्ध नहीं कराई है, वे पांच जून तक भेज दें। रजिस्ट्रार ने कहा कि अगर निर्धारित समय पर अंकतालिका उपलब्ध नहीं कराई गई तो समझा जाएगा कि कॉलेज लापरवाही कर रहे हैं। ऐसे कॉलेजों पर कार्रवाई की जाएगी।

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