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किस्सा बाबू जगजीवन राम के हेलीकॉप्टर से जुड़ा, लोगों का ऐसा गुस्सा शायद ही किसी नेता ने झेला हो

Fri, 05 Apr 2019 01:33 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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1977 के लोकसभा चुनाव में प्रचार के लिए बांदा आए थे बाबू जगजीवन राम
देश के उपप्रधानमंत्री रहे बाबू जगजीवन राम की जयंती के दिन हम आपको उनसे जुड़ी एक अप्रत्याशित घटना के बारे में बताने जा रहे हैं। यह घटना आज भी यहां के लोगों के दिलोदिमाग में बसी है। वे 1977 के लोकसभा चुनाव में प्रचार के लिए बांदा आए थे। उसी दौरान लोगों ने कुछ ऐसा कर डाला कि पायलट बाबू जगजीवन राम को लिए बिना ही हेलीकॉप्टर लेकर चला गया। मजबूरी में उन्हें सड़क मार्ग से कानपुर जाना पड़ा।

 
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यह देख पायलट घबरा गया और हेलीकॉप्टर लेकर उड़ भागा

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बाबू जगजीवन राम
बाबू जगजीवन राम का जन्म 5 अप्रैल 1908 को बिहार के चंदवा गांव में हुआ था। छात्र जीवन से ही वे स्वतंत्रता संग्राम और राजनीति में सक्रिय हो गए। बिहार के सासाराम संसदीय क्षेत्र से कई बार सांसद चुने गए। उनकी लोकप्रियता इतनी थी कि उनके सामने चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों की जमानत तक जब्त हो जाती थी।
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यह भी मशहूर है कि वे इंदिरा गांधी के बहुत करीबी थे

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बाबू जगजीवन राम
बाबूजी बांदा के बाशिंदों के बीच आज भी एक अप्रत्याशित घटना को लेकर याद किए जाते हैं। देश में आपातकाल के बाद हुए 1977 में हुए आम चुनाव में जनता पार्टी के प्रत्याशी अंबिका प्रसाद पांडेय के चुनाव प्रचार में बाबूजी हेलीकॉप्टर से बांदा शहर आए थे। 
 

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बाबू जगजीवन राम
उनका हेलीकॉप्टर रायफल क्लब ग्राउंड में उतारा गया था। वहां तमाशबीनों का खासा हुजूम था। पुलिस भी थी। बाबूजी हेलीकॉप्टर से उतरकर कार में बैठे और जनसभा स्थल रामलीला ग्रांउड चले गए। इसी बीच हेलीपैड पर खड़े हेलीकॉप्टर पर भीड़ ने पथराव शुरू कर दिया। हेलीकॉप्टर के कुछ शीशे टूट गए। यह देख पायलट घबरा गया और हेलीकॉप्टर लेकर उड़ भागा। उधर, रामलीला मैदान में जनसभा से फुर्सत पाकर बाबूजी हेलीपैड आए तो हेलीकॉप्टर नदारद था।


 
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बाबू जगजीवन राम
स्थानीय नेताओं ने व्यवस्था कर उन्हें कानपुर की तरफ रवाना किया। पथराव की यह घटना बाबूजी को इतनी नागवार गुजरी कि वे फिर कभी बांदा नहीं आए। बाबूजी 1978 से 1980 तक देश के उप प्रधानमंत्री रहे। 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के बाद वह पुन: कांग्रेस में शामिल हो गए। 
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बाबू जगजीवन राम
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक रामेश्वर भाई बताते हैं कि बाबू जगजीवन राम को रामायण का बहुत अच्छा ज्ञान था। उधर, उनके बारे में यह भी मशहूर है कि वे इंदिरा गांधी के बहुत करीबी थे, लेकिन इमरजेंसी लगाए जाने का उन्होंने ही सबसे ज्यादा विरोध किया था। 1971 में उन्होंने कांग्रेस छोड़कर अलग पार्टी कांग्रेस (जे) बना ली थी।
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