यह पहला लोकसभा चुनाव है जब पाठा के शेर कहे जाने वाले पूर्व सांसद प्रकाश टिकरिया के बोल लोग नहीं सुन सकेंगे। डाकू ददुआ के पनाहदाता और अपने बेबाक बोलों के कारण इलाके में रसूख रखने वाले मानिकपुर क्षेत्र के टिकरिया गांव निवासी प्रकाश नारायण त्रिपाठी का नाम दबंग सांसद के रूप में लिया जाता रहा है।
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दबंगई इतनी कि पुलिस इंस्पेक्टर को हमेशा दरोगी ही कहा
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पूर्व सांसद प्रकाश नारायण त्रिपाठी
वैसे तो वे इलाहाबाद विश्वविद्यालय से अंग्रेजी में परास्नातक थे, लेकिन आमतौर पर भाषा मानिकपुर के ग्रामीण क्षेत्र की ही बोला करते थे। अपनी भाषा में बात करने वाले शायद वे पहले सांसद थे। पहली बार भाजपा के टिकट पर वर्ष 1991 में बांदा-चित्रकूट सीट से जीतकर दिल्ली पहुंचे।
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पूर्व सांसद प्रकाश नारायण त्रिपाठी
दिल्ली पहुंचने के बाद उनका ठिकाना बांदा की पालीवाल बिल्डिंग या फिर कर्वी में विवेक अग्रवाल का पेट्रोल पंप हुआ करता था।प्रचार के दौरान उनकी देहाती बातों को सुनकर लोग खूब मजा लिया करते थे।
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पूर्व सांसद प्रकाश नारायण त्रिपाठी
दबंगई इतनी कि उन्होंने पुलिस इंस्पेक्टर को हमेशा दरोगी ही कहा। पहली बार का टर्म पूरा होने के बाद दूसरी बार एक दिन के अंदर तीन पार्टियों बदलने का अद्भुत रिकार्ड भी कायम किया।
सुबह कांग्रेस, दोपहर को सपा और रात होते-होते बसपा के सदस्य बन गए
सुबह कांग्रेस, दोपहर को सपा और रात होते-होते बसपा के सदस्य बन गए थे। अगला लोकसभा का चुनाव इन्होंने शिवसेना से लड़ा। अपने अंतिम समय ये समाजवादी पार्टी के लिए काम कर रहे थे।