जिला पर्यावरण समिति ने गंगा किनारे और आसपास के 700 मीटर के दायरे में किसी भी तरह की पालीथिन का इस्तेमाल पूरी तरह से प्रतिबंधित कर दिया है। साथ ही नगर निगम को आदेश दिया है कि 25 फरवरी तक पालीथिन का इस्तेमाल रोका जाए। ऐसा नहीं हुआ तो नगर निगम के जिम्मेदार अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
पालीथिन बेचने या फिर उसका इस्तेमाल करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी। रिसाइकिलिंग से बनने वाली 40 माइक्रोन से ज्यादा की पालीथिन का इस्तेमाल शहर में खाद्य पदार्थों के लिए नहीं किया जाएगा। इसे प्रतिबंधित किया गया है। पालीथिन बनाने और बेचने वालों का डाटा भी तैयार किया जाएगा।
मानक दरकिनार करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और जुर्माना तय किया जाएगा। समिति से निर्धारित परिधि में कमिश्नर, डीएम, एसएसपी दफ्तर, डीएम और आईजी का आवास है। पुलिस लाइन और जेल भी इसी परिधि में आएगी।
गंगा को प्रदूषण मुक्त बनाने और शहर के पर्यावरण को सुधारने के उद्देश्य से मंगलवार को कलक्ट्रेट सभागार में जिला पर्यावरण समिति की महत्वपूर्ण मीटिंग हुई।
डीएम कौशल राज शर्मा की अध्यक्षता में समिति ने गंगा किनारे और उसके आसपास के 700 मीटर दायरे में अवैध निर्माण पर रोक लगा दी। साथ ही केडीए से कहा कि इसके दायरे में आने वाले अवैध निर्माण ध्वस्त किए जाएं। अवैध निर्माण रोकने और गंगा से निर्धारित दूरी तय करने की जिम्मेदारी केडीए, सिंचाई विभाग को दी गई है। गंगा के आसपास बसे 37 ग्राम पंचायतों का कचरा गंगा में न जाए, इसके लिए हर घर में टॉयलेट बनवाने का फैसला हुआ। इन ग्राम पंचायतों में पर्यावरण जागरूकता अभियान भी चलाया जाएगा।
बिठूर और उसके आसपास से गंगा में गिरने वाले 7 नाले पूरी तरह से बंद किए जाएंगे। इसके लिए बिठूर में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने का फैसला हुआ है। इसके लिए जमीन चिह्नित की जा चुकी है। अब जल निगम को डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) बनाकर देनी है। समिति को बताया गया कि गंगा में गिरने वाले 23 में से 21 नाले बंद किए जा चुके हैं। सीसामऊ नाला बंद करने पर काम चल रहा है। इस पर जल निगम को 15 दिन में रिपोर्ट बनाकर देनी है। बिनगवां सहित शहर के चार क्षेत्रों में लगने वाले एसटीपी प्लांट की जानकारी भी समिति ने ली है।