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कानून व्यवस्था बिगड़ने पर फैसले लेने को आजाद होगी पुलिस, लाठीचार्ज से लेकर गोली चलाने का होगा अधिकार

Sun, 19 Jul 2020 05:10 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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यूपी पुलिस - फोटो : अमर उजाला
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कानपुर में पुलिस कमिश्नरी सिस्टम लागू होने से पुलिस की शक्तियां बढ़ने के साथ जिम्मेदारियां भी बढ़ जाती हैं। खासतौर पर कानून-व्यवस्था और अपराधियों पर कार्रवाई करने के मामले में कमिश्नरेट प्रणाली में अगर कानून-व्यवस्था बिगड़ती है तो ऐसी स्थिति में पुलिस वन मैन आर्मी की भूमिका में होगी। दंगाइयों को कैसे रोकना है? क्या कार्रवाई करनी है? गोली-आंसू गैस चलाने हैं या नहीं? ऐसे तमाम निर्णय पुलिस अफसर ले सकेंगे। इसके लिए प्रशासन की अनुमति की जरूरत नहीं पड़ेगी। इससे गंभीर हालात से निपटने में आसानी होगी।
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कई बार समन्वय न होने से बिगड़ जाते हैं हालात
दंगा-फसाद होने पर पुलिस को मोर्चा लेना होता है। दंगाई एक तरफ ईंट पत्थर चलाते हैं तो पुलिस के पास लाठी-बंदूक, आंसू गैस के गोले, रबर बुलेट आदि होती है लेकिन उसका इस्तेमाल वह नहीं कर सकते। उनके हाथ बंधे होते हैं। इसके लिए डीएम की अनुमति की जरूरत पड़ती है। कई बार अनुमति मिलने में देरी होती है या फिर पुलिस-प्रशासन का समन्वय न होने से दिक्कतें पैदा होती है। इससे हालात बिगड़ जाते हैं। दंगाई उग्र होते हैं और पुलिस बैकफुट पर। कमिश्नरी सिस्टम लागू होने से पुलिस अफसर तत्काल उचित कार्रवाई का आदेश कर हालात को नियंत्रित कर सकेंगे।
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छह महीने बाद सिर्फ 11 पर लग सका गैंगेस्टर
कमिश्नरी सिस्टम लागू न होने से किस तरह की दिक्कतें आती हैं, उसका एक ताजा उदाहरण है। सीएए के विरोध में पिछले साल दिसंबर में हिंसा हुई थी। मामले में शासन के निर्देश हैं कि दंगाइयों पर गैंगेस्टर से लेकर एनएसए तक की कार्रवाई करें। छह महीने बाद सिर्फ 11 दंगाइयों पर ही गैंगस्टर लग सका है। कार्रवाई में देरी होने पर पुलिस की लापरवाही भी है। वहीं प्रशासनिक अफसरों पर निर्भरता भी बड़ा कारण है। अगर कमिश्नरी प्रणाली लागू होती तो पुलिस के पास इन दंगाइयों पर गैंगेस्टर और एनएसए लगाने का भी अधिकार होता। साफ है तो अभी तक अधिक से अधिक आरोपियों पर कार्रवाई हो चुकी होती।

पुलिस कमिश्नर ही होगा जिम्मेदार
वर्तमान में कानून-व्यवस्था बिगड़ने की स्थिति में जवाबदेही डीएम और एसएसपी की साझे के तौर पर होती है। जब कमिश्नरेट लागू हो जाएगा तो पूरी जवाबदेही पुलिस कमिश्नर की हो जाएगी, क्योंकि कानून-व्यवस्था संबंधी लगभग सभी अधिकारी उसी के पास होंगे।

इसलिए पीछे रह गया कानपुर
छह महीने पहले शासन ने लखनऊ और नोएडा में कमिश्नरेट प्रणाली लागू की। सरकार का कहना था कि छह महीने इन शहरों में नई व्यवस्था ट्रायल के रूप में शुरू की गई है। समीक्षा में सकारात्मक परिणाम आते हैं तो दूसरे चरण में कानपुर, वाराणसी और गाजियाबाद में इसे लागू किया जाएगा। अगर ट्रायल के तौर पर लागू न किया जाता तो सूबे के पांच से छह शहरों में एक साथ कमिश्नरेट लागू होता। चूंकि इस व्यवस्था में इन्फ्रास्ट्रक्चर के साथ सुविधाएं भी बढ़ानी होती हैं, इसलिए पहले चरण में दो शहरों को ही चिह्नित किया गया।
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