कानपुर के जनरलगंज में मां के शव के साथ चार दिन तक रहने वाले बेटे विकास गोयनका ने पुलिसवालों के सामने ऐसी बातें कहीं कि सुनकर सब चौंक गए। इंस्पेक्टर देवेंद्र विक्रम सिंह ने शांती देवी का शव विकास को रिसीव कराने के लिए तीन घंटे तक जद्दोजहद की। इसके बाद विकास ने लिखापढ़ी कर मां का शव रिसीव कर लिया, लेकिन पोस्टमार्टम हाउस से उठाया नहीं। वह पुलिस वालों से कह रहा था कि मां का शव मुंबई ले जाएंगे। वहां मृत शरीर में आत्मा डलवाएंगे। बस थोड़ा इंतजार करो, ट्रेन का रिजर्वेशन मिल जाए। विकास ने इंस्पेक्टर को यह भी बताया कि मां घर में गिर गईं थीं। वह उनको रीजेंसी हास्पिटल ले गया था। वहां डॉक्टरों ने मां को मृत घोषित कर दिया था। इसके बाद कई और अस्पतालों में मां को ले गया था। इसके बाद शव को घर में ही रख लिया था।
विज्ञापन
2 of 6
इसी घर में मिली बुजुर्ग महिला की चार दिन पुरानी लाश
घंटों पोस्टमार्टम में देर रात तक पड़ा रहा शव
पोस्टमार्टम के बाद शांति देवी का शव देर रात तक वहां पड़ा रहा। विकास ने शव लेने से इनकार कर दिया। घर से शव निकाले जाने से नाराज विकास ने पुलिस वालों से कहा कि आप लोग ताला तोड़कर मेरे घर में कैसे दाखिल हुए। शव को क्यों निकाला। इस बात को लेकर वह पुलिस कर्मियों से झिकझिक करता रहा। विकास के परिवार का कोई भी शख्स पोस्टमार्टम हाउस नहीं पहुंचा। सीओ कलक्टरगंज गौरव वंशवाल ने बताया कि पोस्टमार्टम में शांति देवी की हेड इंजरी से मौत की पुष्टि होने पर मामला संदिग्ध हो गया है। चोट हादसे में आई है उनकी हत्या की गई, यह जांच के बाद साफ हो सकेगा।
विज्ञापन
3 of 6
इसी कमरे में चार दिनों तक पड़ी रही महिला की लाश, बदबू से पड़ोसी रहे बेहाल
खरीद कर ले आया था बर्फ व ताबूत
विकास मां का शव मुंबई ले जाने के लिए ताबूत भी खरीद कर ले आया था। उसके घर में ताबूत मिला है। उसने पुलिस को रिजर्वेशन का फार्म भी दिखाया। मां का शव सुरक्षित रखने के लिए विकास बुधवार को बर्फ खरीद कर घर लाया था, लेकिन शव को बर्फ पर नहीं रखा था। पुलिस मौके पर पहुंची तो बर्फ की सिल्ली जमीन पर रखी थी और शव बेड़ पर पड़ा था। कुछ लोगों का यह भी कहना है कि वह लकड़ी-प्लाई आदि खरीद कर खुद ही घर में ताबूत बना रहा था।
4 of 6
विकास के बयान सुनकर पुलिस हैरान
काफी पढ़ा-लिखा है विकास
विकास को हिंदी के साथ अंग्रेजी और मराठी भाषा का भी ज्ञान है। वह फर्राटे से अंग्रेजी बोलता है। कलक्टरगंज थाने में बातचीत के दौरान विकास ने बताया कि वह बीकाम, एलएलबी है। वह हाईकोर्ट व सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करता है। उसके पास जनरलगंज और मुंबई में काफी संपत्ति है। जनवरी 2016 में वह शहर आया था। तब से मां के साथ रह रहा है।
महाराष्ट्र में उसने हिंदी भाषी लोगों के लिए बहुत काम किया है। समाजसेवा भी की है। 2012 से उसका कानपुर आना-जाना रहा है। विकास ने आरोप लगाया कि कुछ लोगों की उसकी संपत्ति पर नजर है। वे लोग उसे और मां को परेशान करते हैं। घर से निकलने भी नहीं देते थे। वह घर से निकलता था, तो उसे जान से मारने की धमकी दी जाती है। विकास ने यहां तक कहा कि दबंगों की वजह से वह मां को इलाज के लिए अस्पताल नहीं ले जा सका। घर में ही डॉक्टर को बुलाकर मां का इलाज कराता था।
कई बार एसएसपी से लेकर थानेदार तक को प्रार्थनापत्र देकर मदद की गुहार लगाई। सभी अफसरों ने न्याय का भरोसा दिया, लेकिन कार्रवाई नहीं की। उसके पास शिकायती पत्रों की छाया प्रति और मोबाइल पर अफसरों के मैसेज भी हैं।
विज्ञापन
5 of 6
मामले की जांच पड़ताल करती पुलिस
स्नान करने से बचता है विकास
विकास के घर के आसपास रहने वालों का कहना है कि विकास पढ़ा-लिखा है। काफी सोर्सफुल भी है। रुपयों की कमी नहीं है। दुकानों से वह सामान भी नगद खरीदता है, लेकिन नहाने से बचता है। मोहल्ले वालों के ज्यादा कहने पर बमुश्किल वह मुंह-हाथ धो लेता है। पुलिस का मानना है कि विकास किसी तरह का नशा करता है।
कमरे से आ रही दुर्गंध के कारण रुमाल से मुंह ढके पुलिस सिपाही
साइको लगता है विकास
पुलिस अफसरों का कहना है कि विकास से बातचीत करने पर लगता है कि वह साइको है। बातचीत अच्छी करता है। ज्ञान भी है। विकास से पूछा कि आपकी मां कैसी थीं, तो तपाक से बोला, थीं नहीं, हैं। पिता के बारे में बोला कुछ मत बोलो, चुप रहो। बोला, मां हैं, उन्हें भिंवडी ले जाना है। इंतजार ट्रेन का रिजर्वेशन कंफर्म होना का है। पूछताछ के दौरान वह अपने कार्यों और संपर्कों का जिक्र करने लगता है। पुलिस अफसरों का कहना है कि कोई सामान्य व्यक्ति शव के साथ घर में नहीं रह सकता। विकास की बातचीत और गतिविधियों से लगता है कि वह साइको है। उसका मनोचिकित्सक से चेकअप कराया जाएगा।