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बक्से के सहारे सराफ के हत्यारों तक पहुंची पुलिस, बिगड़े रईसों ने कर डाली वारदात

Fri, 22 Sep 2017 12:34 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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इसी बलवीर से खरीदा गया था बक्सा। - फोटो : अमर उजाला
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लखनऊ के सराफा व्यापारी की लूट के बाद हत्या की घटना का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। जिस बक्से में शव मिला, उसी बक्से के सहारे पुलिस कड़ियां जोड़ते हुए हत्यारों तक पहुंची। नवाबगंज कस्बे के एक सराफा व्यापारी ने अपने दो साथियों के साथ मिलकर वारदात को अंजाम दिया था।बुधवार देर रात पुलिस ने मुख्य हत्यारोपी के घर से लूटे गए जेवर, मृतक की चेकबुक बरामद कर ली। मुख्य हत्यारोपी सहित दो लोगों को पुलिस ने दबोच लिया है। तीसरा फरार है।
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लखनऊ के शांतिकुंज अंबेडकरनगर निवासी बुजुर्ग सराफा व्यापारी सरदार कुलदीप सिंह की रविवार को उन्नाव के नवाबगंज आते समय 11 लाख के जेवर लूटकर हत्या कर दी गई थी। हत्यारों ने शव को एक बक्से में बंद कर अजगैन थानाक्षेत्र में मुर्तजानगर नहर में फेंक दिया था। मंगलवार को शव मिलने के बाद अजगैन कोतवाल संतोष तिवारी ने लखनऊ कृष्णानगर कोतवाली पुलिस के साथ तफ्तीश शुरू की। बक्से के कुंडे में अमन कंपनी का नाम और टीन के मार्का के बक्सों की दुकानों को खंगालना शुरू किया गया।

तलाश करते हुए पुलिस नवाबगंज कस्बे के मोहल्ला पछियांव में बक्सा विक्रेता बलवीर सिंह की दुकान पर पहुंची तो हत्यारों तक पहुंचने में देर नहीं लगी। बलवीर ने बताया कि कस्बा निवासी सराफा व्यापारी सागर गुप्ता उर्फ रजत ने रविवार सुबह 1000 रुपये में बक्सा खरीदा था। बक्सा उसकी सफारी गाड़ी की डिग्गी में नहीं आ रहा था। इस पर सागर ने अपनी गाड़ी के स्पीकर खोलकर उसके पास रख दिए थे। इन्हें वह सोमवार को ले गया था। पुलिस ने सागर गुप्ता को उठाकर पूछताछ की तो वह टूट गया।
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उसने पुलिस को बताया कि जेवर सप्लाई करने वाले सरदार कुलदीप सिंह से उसके पिता के समय से पारिवारिक रिश्ते थे। कुलदीप सिंह एक प्लाट खरीदना चाहता था। शनिवार को इसे लेकर कुलदीप से फोन पर बात हुई थी। रविवार क ी सुबह वह अपनी सफारी गाड़ी से लखनऊ पुरानी चुंगी पहुंचा। कुलदीप सिंह को अपनी गाड़ी में बैठा लिया। योजना के मुताबिक सोहरामऊ के भल्लाफार्म के पास अजगैन के चमरौली निवासी उसका दोस्त शिखर दीक्षित उर्फ बीरू और मलाव गांव निवासी आशीष द्विवेदी मिले। इन्हें गाड़ी में बैठा लिया।


 
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डेमो पिक
भल्लाफार्म के पास सुनसान स्थान पर आशीष और शिखर ने रस्सी से कुलदीप का गला कसाने के बाद लोहे की डिस्क प्लेट से गर्दन और सिर पर वार कर हत्या कर दी। इसके बाद गाड़ी के भीतर ही शव को बक्से में भर दिया। दोपहर करीब एक बजे वह तीनों मुर्तजानगर पहुंचे। सुनसान स्थान पर बक्से को नहर में फेंक दिया। सागर ने पुलिस को बताया कि कुलदीप सिंह को उसे करीब 250 ग्राम जेवर के रुपये देने थे। वह सट्टे में कई लाख रुपये हार चुका था। इससे उसने अपने साथियों से मिलकर वारदात की योजना बनाई। अजगैन कोतवाली प्रभारी संतोष तिवारी ने बताया कि फरार आरोपी आशीष की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।

 बिगड़े रईसों ने कर डाली वारदात

सागर गुप्ता सपा युवजन सभा में पूर्व जिला उपाध्यक्ष रह चुका है। उसके बाबा और पिता भी सराफा का काम करते थे। करीब दस साल पहले पिता प्रेमकांत गुप्ता का देहांत हो गया था। बड़े भाई रोहित के बीच संपत्ति का बंटवारा हुआ। इसमें उसके हिस्से में दुकान और रकम आई। बड़े भाई को बैंक में जमा रकम मिली थी। मां प्रेमलता सागर के साथ ही रहती थीं। सात साल का बेटा लखनऊ में पढ़ता है। एक बेटी अभी तीन माह की है। शिखर और आशीष भी शादीशुदा हैं। यह पूर्व में प्रापर्टी डीलिंग का काम करते थे। पुलिस के मुताबिक तीनों बिगड़े हुए रईसजादे हैं।

 पुलिस के सामने बहाए थे आंसू
जिस दिन पुलिस ने सराफ कुलदीप सिंह का शव नहर से बरामद किया, कस्बे के तमाम सराफा व्यापारी अजगैन थाने पहुंचे थे। इनमें सागर भी साथ था। वह कोतवाल के सामने काफी देर तक बैठकर अपने पारिवारिक रिश्ते और कुलदीप की अच्छाइयां बताता रहा। जिस समय वह थाने में था, सर्विलांस पर उस संदिग्ध मोबाइल की लोकेशन सोहरामऊ और नवाबगंज के बीच बताती रही। कोतवाल ने बताया कि उस समय कतई अंदाजा नहीं था कि देखने में सीधा साधा सागर ऐसी जघन्य वारदात कर सकता है।
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