लखनऊ के सराफा व्यापारी की लूट के बाद हत्या की घटना का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। जिस बक्से में शव मिला, उसी बक्से के सहारे पुलिस कड़ियां जोड़ते हुए हत्यारों तक पहुंची। नवाबगंज कस्बे के एक सराफा व्यापारी ने अपने दो साथियों के साथ मिलकर वारदात को अंजाम दिया था।बुधवार देर रात पुलिस ने मुख्य हत्यारोपी के घर से लूटे गए जेवर, मृतक की चेकबुक बरामद कर ली। मुख्य हत्यारोपी सहित दो लोगों को पुलिस ने दबोच लिया है। तीसरा फरार है।
लखनऊ के शांतिकुंज अंबेडकरनगर निवासी बुजुर्ग सराफा व्यापारी सरदार कुलदीप सिंह की रविवार को उन्नाव के नवाबगंज आते समय 11 लाख के जेवर लूटकर हत्या कर दी गई थी। हत्यारों ने शव को एक बक्से में बंद कर अजगैन थानाक्षेत्र में मुर्तजानगर नहर में फेंक दिया था। मंगलवार को शव मिलने के बाद अजगैन कोतवाल संतोष तिवारी ने लखनऊ कृष्णानगर कोतवाली पुलिस के साथ तफ्तीश शुरू की। बक्से के कुंडे में अमन कंपनी का नाम और टीन के मार्का के बक्सों की दुकानों को खंगालना शुरू किया गया।
तलाश करते हुए पुलिस नवाबगंज कस्बे के मोहल्ला पछियांव में बक्सा विक्रेता बलवीर सिंह की दुकान पर पहुंची तो हत्यारों तक पहुंचने में देर नहीं लगी। बलवीर ने बताया कि कस्बा निवासी सराफा व्यापारी सागर गुप्ता उर्फ रजत ने रविवार सुबह 1000 रुपये में बक्सा खरीदा था। बक्सा उसकी सफारी गाड़ी की डिग्गी में नहीं आ रहा था। इस पर सागर ने अपनी गाड़ी के स्पीकर खोलकर उसके पास रख दिए थे। इन्हें वह सोमवार को ले गया था। पुलिस ने सागर गुप्ता को उठाकर पूछताछ की तो वह टूट गया।
उसने पुलिस को बताया कि जेवर सप्लाई करने वाले सरदार कुलदीप सिंह से उसके पिता के समय से पारिवारिक रिश्ते थे। कुलदीप सिंह एक प्लाट खरीदना चाहता था। शनिवार को इसे लेकर कुलदीप से फोन पर बात हुई थी। रविवार क ी सुबह वह अपनी सफारी गाड़ी से लखनऊ पुरानी चुंगी पहुंचा। कुलदीप सिंह को अपनी गाड़ी में बैठा लिया। योजना के मुताबिक सोहरामऊ के भल्लाफार्म के पास अजगैन के चमरौली निवासी उसका दोस्त शिखर दीक्षित उर्फ बीरू और मलाव गांव निवासी आशीष द्विवेदी मिले। इन्हें गाड़ी में बैठा लिया।