10 जुलाई को दर्ज कराई थी गुमशुदगी
27 जुलाई को पुलिस निकाल पाई लोकेशन, खुद खोजने के लिए भेज दिया। पिता प्रताप सिंह ने बताया कि पुलिस ने 10 जुलाई को गुमशुदगी दर्ज करने के बाद भी बेटे की तलाश नहीं की। प्रताप के अनुसार छह जुलाई को ही लापता होने के बाद बेटे ने उन्हें देहात के जुगराजपुर निवासी राज मिस्त्री दीपू के मोबाइल नंबर से बेटे ने कॉल किया था।
बेटे की हत्या होने का शक हुआ
यह नंबर उन्होंने रिपोर्ट दर्ज होने के बाद कल्याणपुर पुलिस को दिया था। पुलिस ने 27 जुलाई को लोकेशन खोज सकी। इसके बाद भी खुद तलाश न करके उन्हें ही देहात के जुगराजपुर की लोकेशन बताकर बेटे को खुद ही खोजने के लिए भेजा दिया। जब गांव पहुंचे तो दीपू की बातचीत से उन्हें बेटे की हत्या होने का शक हुआ।
आरोपियों से सख्ती से पूछताछ में हुआ खुलासा
यह बात उन्होंने कल्याणपुर पुलिस को भी बताई, लेकिन पुलिस ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। 21 अगस्त को कल्याणपुर पुलिस ने आरोपियों को थाने में पूछताछ के लिए बुलाया तभी गांव के प्रधान से 12 जुलाई को कुएं से एक शव मिलने का पता चला। आरोपियों से सख्ती से पूछताछ हुई, तो उन्होंने हत्या की बात कबूल की।
रुपयों के लेनदेन में की थी हत्या
दीपू ने पुलिस को बताया कि छह जुलाई की रात को उसने अपने भाइयों सर्वेश, दीपक, पिंटू के साथ जुगराजपुर स्थित अपने घर पर ही अरुण के साथ शराब पी। इसके बाद लेनदेन के विवाद को लेकर सभी ने मिलकर अरुण की गला दबाकर हत्या कर दी। शव को कुएं में फेंक दिया।
बदबू आने पर बरामद हुआ था शव
12 जुलाई को बदबू आने पर शव बरामद हुआ, लेकिन शिनाख्त न होने के कारण पुलिस ने लावारिस में अंतिम संस्कार करा दिया। रविवार को आलाधिकारियों की फटकार के बाद कल्याणपुर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्जकर उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।