कानपुर। कमिश्नरी पुलिस ने अधिवक्ता धीरज उपाध्याय उर्फ दीनू के अपराधों का ब्योरा एकत्रित किया है। उस पर अब तक 14 रिपोर्ट हो चुकी हैं। इनमें सात ऐसे मामले हैं, जिसमें दीनू का नाम सामने आया है। माना जा रहा है कि पुलिस उसे जमानत के विरोध में आपराधिक इतिहास के तौर पर लगाने की तैयारी कर रही है।
नवाबगंज थाने में दीनू पर पहली एफआईआर 1988 में हत्या की दर्ज हुई। इसमें चार्जशीट लगाई गई थी। इसी साल नवाबगंज थाने में ही दूसरी रिपोर्ट हत्या के प्रयास और जबरन वसूली का दर्ज की गई, हालांकि इसमें अंतिम रिपोर्ट लग गई थी। वर्ष 1992 में बलवा, वर्ष 1997 में साधारण मारपीट और अपहरण व षडयंत्र की एफआईआर हुई। इन एफआईआर के बाद दीनू पर करीब 22 वर्षों तक कोई रिपोर्ट नहीं लिखी गई। वर्ष 2019 में दीनू पर मारपीट, बलवा, हत्या के प्रयास की रिपोर्ट दर्ज की गई। अगले साल वर्ष 2020 में चकेरी थाने में सेवन सीएलए, बलवा समेत अन्य गंभीर धाराओं में एफआईआर हुई। वर्ष 2024 में दीनू पर धोखाधड़ी और षडयंत्र की रिपोर्ट दर्ज की गई। इसी साल उसके खिलाफ हरवंश मोहाल थाने में दर्ज जबरन वसूली, धमकी के एक मामले में नाम प्रकाश में आया। वर्ष 2025 में दीनू पर ग्वालटोली, कोतवाली, नौबस्ता, नवाबगंज में एफआईआर हुई। इसके साथ ही वर्ष 2020 को जाजमऊ के हुए पिंटू सेंगर हत्याकांड में भी उसका नाम सामने आया है। बहरहाल पुलिस ने दीनू पर दर्ज सभी एफआईआर की सूची तैयार कर रही है। दीनू पर मई माह में ही सात रिपोर्ट दर्ज की गई हैं।