यूपी के फर्रुखाबाद जिले में बुजुर्ग की जलाकर हत्या करने वालों का पुलिस सुराग नहीं लगा पाई। खुलासा करने में असफल रही पुलिस ने मुकदमे में फाइनल रिपोर्ट लगा दी है। हत्या कर शव फेंकने के मुकदमे की फाइल बंद होने से बुजुर्ग की हत्या का राज एक राज बनकर ही रह गया है।
मोहम्मदाबाद कोतवाली क्षेत्र के नला बीच गांव निवासी रामनिवास के खेत के पास करीब आठ फीट गहरे गड्ढे में 25 फरवरी 2018 को एक अज्ञात व्यक्ति का अधजला शव पड़ा मिला था। ग्रामीणों की सूचना पर पुलिस ने मौके पर पहुंच कर शव का पोस्टमार्टम कराया। इसमें हत्या कर साक्ष्य मिटाने के लिए शव जलाने का प्रयास करने का मामला सामने आया।
ग्रामसभा सकवाई की प्रधान पति सतेंद्र सिंह ने हत्या और साक्ष्य मिटाने के मामले में मोहम्मदाबाद कोतवाली में 26 फरवरी 2018 को अज्ञात हत्यारों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। शिनाख्त में शव मऊदरवाजा थाना क्षेत्र के गांव ऊगरपुर निवासी रामसिंह (62) का निकाला। मुकदमे की विवेचना कोतवाल राजेश पाठक ने शुरू की। इनके तबादले के बाद कोतवाल संजय कुमार गुप्ता, अनूप कुमार निगम और आखिर में कोतवाल दधिबल तिवारी ने विवेचना की। हत्यारोपियों का सुराग लगाने को पुलिस ने सर्विलांस का सहारा लिया। फिर भी पुलिस को हत्यारोपियों तक नहीं पहुंच सकी।
एक साल तक चली विवेचना में पुलिस हत्याकांड का खुलासा नहीं कर पाई और आखिर में पिछले दिनों तत्कालीन मोहम्मदाबाद कोतवाल दधिबल तिवारी ने मुकदमे में फाइनल रिपोर्ट लगाकर पत्रावली बंद कर दी। लगाई गई फाइनल रिपोर्ट में कहा गया कि हत्या का खुलासा नहीं हो सका है और भविष्य में भी खुलासा होने की संभावना नहीं लग रही है। मुकदमा पुराना है, इसलिए अंतिम आख्या लगाई जा रही है। मोहम्मदाबाद कोतवाल शीलष गौतम ने बताया कि तत्कालीन कोतवाली ने एफआर लगाई होगी, उन्हें जानकारी नहीं है।