इसमें आरोप लगाया गया था कि दहेज में तीन लाख रुपये न मिलने पर विनीता की हत्या कर दी गई। विनीता का शव फंदे से लटका मिला था। एडीजीसी प्रदीप वाजपेई ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिर पर चोट की पुष्टि हुई थी।
सास उर्मिला और ससुर राजीव यादव कन्नौज में अलग रहते थे, जबकि ननद नोएडा की कंपनी में काम करती थी और वहीं रहती थी। इसी आधार पर अपर जिला जज पंचम संजय कुमार वर्मा ने तीनों को दोषमुक्त करार दिया, जबकि कांस्टेबल को 20 साल कैद की सजा सुनाई।
माता-पिता मुकरे
विनीता के भाई दीपू ने कोर्ट में दहेज प्रताड़ना की बात कही, लेकिन उसके बाद विनीता की मां वेदरानी और पिता सियाराम ने कोर्ट में दहेज प्रताड़ना की बात से इनकार कर दिया था।
जीडी में कराया था खेल
पुलिस में होने का फायदा उठाते हुए कांस्टेबल ऋषिपाल ने जीडी में भी खेल कराया। घटना के दिन उसने जीडी में एसओजी टीम के साथ रवानगी की एंट्री कराई थी। कोर्ट ने कहा कि सामान्यत: सर्विलांस टीम का सिपाही एसओजी के साथ नहीं जाता। घटना के दिन के अलावा ऋषिपाल उससे पहले एसओजी के साथ नहीं गया। इससे साफ हो गया कि उसने जीडी में गलत एंट्री कराई थी।