यूपी के बांदा जिले में भाजपा नेता को थाने ले आने पर यहां कोतवाली में शनिवार रात भाजपाइयों और पुलिस में विवाद हो गया। कोतवाली में प्रभारी निरीक्षक समेत अन्य पुलिस कर्मियों की जमकर फजीहत करने के बाद देर रात भाजपा नेता अपनी पार्टी के नेता को थाने से ले गए। अलबत्ता उसके विरोधी और अपना दल कार्यकर्ता का पुलिस ने धारा 151 में चालान कर दिया।
नरैनी के कालिंजर मार्ग में शनिवार को होली की हुड़दंग में दो सगे भाई शराब के नशे में उत्पात मचा रहे थे। तभी भाजपा के नरैनी नगर अध्यक्ष प्रदीप सिंह सेंगर उर्फ मोनू मौके पर पहुंच गए और दोनों भाइयों को रोका तो वे उनसे भिड़ गए।
इसी बीच कोतवाली प्रभारी पंकज पांडेय मौके पर आ गए और प्रदीप सिंह सेंगर को जीप पर बैठाकर थाने ले आए। कुछ ही देर बाद दीपक सोनी भी थाने पहुंच गए। भाजपा के स्थानीय नेताओं ने कोतवाली प्रभारी पर इस मामले में सुलह का दबाव बनाया। लेकिन कोतवाली प्रभारी का कहना था कि त्योहार के मौके पर हंगामा मचाने पर दोनों के खिलाफ कार्रवाई होगी। भाजपा नेताओं ने रात करीब आठ बजे डीआईजी को सूचना दी। बताते हैं कि डीआईजी ने कोतवाली प्रभारी को फोन पर निर्देश दिए कि समझौता करा दें।
इसी बीच भाजपा जिलाध्यक्ष इंद्रपाल सिंह पटेल, विधायक प्रकाश द्विवेदी और राजकरन कबीर, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष महेंद्र सिंह वर्मा, पुष्कर द्विवेदी आदि समर्थकों के साथ थाने पहुंच गए। उनके पहुंचते ही वहां मौजूद कार्यकर्ताओं के तेवर और स्वर बदल गए। कुछ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने कोतवाली प्रभारी की मेज पर हाथ पटके। भाजपा नेताओं ने कहा कि सुलह नहीं अब कार्रवाई हो। भाजपाइयों ने नारे शुरू कर दिए। कोतवाली प्रभारी के साथ क्षेत्राधिकारी सोहराब आलम भी भाजपाइयों के इस हंगामे का सामना करते रहे। भाजपा नेताओं ने पुलिस अफसरों का हड़काया कि उनके नगर मंडल अध्यक्ष को चार घंटे से बिना किसी रिपोर्ट के थाने में कैसे बैठा रखा है? लगभग एक घंटा हंगामा करने के बाद भाजपा नेता अपने नगर मंडल अध्यक्ष प्रदीप सिंह सेंगर को थाने से निकालकर अपने साथ ले गए। दूसरी तरफ पुलिस ने दीपक सोनी का धारा 144 का चालान कर दिया।
भाजपा जिलाध्यक्ष इंद्रपाल सिंह पटेल ने बताया कि हमने कोई भी गलत या गैर कानूनी कार्य नहीं किया। हमारे मंडल अध्यक्ष के साथ पुलिस गलत कर रही थी। इसलिए आना पड़ा। अब मामला शांत है। कोई बात नहीं है। हमारी मंशा किसी निर्दोष को फंसाने की नहीं थी। लेकिन दोषी को बक्शा नहीं जाना चाहिए।