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हास्य कवि हाहाकारी की मौत ने सभी को झकझोर दिया, '1 हजार रुपये में 365 व्यापार' युवाओं में लोकप्रिय

Tue, 13 Mar 2018 03:21 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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हास्य कवि केडी शर्मा हाहाकारी की पुरानी तस्वीर
अवधी भाषा के हास्य कवि केडी शर्मा (हाहाकारी) की सड़क हादसे में मौत की खबर ने सभी को झकझोर दिया। साहित्य जगत की हस्तियों के साथ ही केडी शर्मा के चाहने वालों की भीड़ सोमवार सुबह ही उनके उन्नाव हैदराबाद स्थित पैतृक आवास पर जुटने लगी थी और ये सिलसिला देर रात तक जारी रहा।
आसीवन थाना क्षेत्र के हैदराबाद में 15 नवंबर 1949 को कृष्ण दत्त शुक्ला (के डी शर्मा ‘हाहाकारी’) का जन्म हुआ था। बचपन से ही जोशीले अंदाज में बात करने की कला ने उन्हें लोकप्रिय बना दिया था। पिता स्व. परशुराम शुक्ला ने कृष्णदत्त शुक्ला को किसी भी चीज का अभाव नहीं होने दिया। उनका बचपन बहन मिंटू के साथ बीता। एक साथ दोनों ने पढ़ाई पूरी की और 1970 में उन्हें शिक्षक की नौकरी मिल गई। साथ ही उन्होंने कविता लिखना और सुनाना शुरू कर दिया था। कविताओं के लेखन के लिए उन्होंने अवधी भाषा को चुना। काव्य रचनाओं में ख्याति के साथ वे काव्य मंचों पर छा गए। समय बीतने के साथ जिले के साथ ही अन्य जिलों से भी काव्य पाठ के लिए आमंत्रण आने लगे थे। सामाजिक मुद्दों व राजनीति पर काव्य पाठ कर उन्होंने कई पुरस्कार भी जीते। अमरउजाला की ओर से उन्हें अमरवाणी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
 
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साथ में सेल्फी खींची और साथ ही दुनिया को कहा अलविदा

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रविवार रात लालगंज में कवि सम्मेलन के दौरान कवि केडी शर्मा ने प्रमोद तिवारी के साथ सेल्फी खींचकर फेसबुक पर पोस्ट की।
रायबरेली जिले के लालगंज में रविवार रात होली मिलन एवं विराट कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया था। इसमें केडी शर्मा हाहाकारी के साथ ही जिले के युवा कवि शिवतोष संघर्षी व कानपुर के विख्यात कवि प्रमोद तिवारी  शिरकत की। हाहाकारी ने रात 9 बजकर 18 मिनट पर सबसे पहले फेसबुक आईडी पर कार्यक्रम में मौजूद श्रोताओं की फोटो अपलोड की। कुछ देर बाद ही उन्होंने प्रमोद तिवारी के साथ अपनी दो सेल्फी और अपलोड कीं। रात 10:10 बजे अतिथियों व आयोजकों की ओर से दिए गए प्रतीक चिह्न की भी फोटो हाहाकारी ने फेसबुक पर डाली थी। इसके पांच घंटे बाद ही दोनों कवि एक साथ दुनिया को अलविदा कह गए। फेसबुक पर अपलोड तस्वीरें उनकी आखिरी तस्वीरों में शामिल हो गई। 

 
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चित्रकारी का भी था शौक 

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हास्य कवि केडी शर्मा हाहाकारी की पुरानी तस्वीर
काव्य पाठ के साथ ही केडी शर्मा को चित्रकारी का भी शौक था। घर में खाली समय में वह चित्रकारी भी किया करते थे। अपने कमरे में उन्होंने ऐसी कई तस्वीरें लगा रखी थी जिन्हें उन्होंने खुद बनाया था। शर्मा सुमेरपुर के बाबाखेड़ा स्थित स्वामी ईश्वरानंद इंटर कालेज में कला विषय के प्रवक्ता थे और वर्ष 2012 में रिटायर हुए थे। गांव में ही उन्होंने एक शिव मंदिर व गोशाला का निर्माण भी कराया था। खाली समय गोशाला में बिताते थे। 
पत्नी और बेटा हुए बेहाल
सोमवार भोर पहर कवि केडी शर्मा की मौत की खबर जैसे ही उनके गांव पहुंची तो सन्नाटा पसर गया। केडी शर्मा के बड़े बेटे वेदप्रकाश, मां रामरक्षा के साथ जिला अस्पताल पहुंचे। यहां पति के शव को देख वह बिलख पड़े। 
 

जिला पुस्तकालय में शोक सभा 

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हास्य कवि केडी शर्मा हाहाकारी की पुरानी तस्वीर
मूर्धन्य कवियों के निधन पर राजकीय जिला पुस्तकालय में शोक सभा हुई। पुस्तकालयाध्यक्ष ने कहा कि हास्य एवं व्यंग्य का नव दीप्तिमान नक्षत्र अस्त हो गया। वहीं पत्रकार लेखक विचारक महासंघ ने भी शोक सभा की। संगठन के प्रदेश संयोजक अरुण कुमार दीक्षित ने कहा कि दोनों कवियों के निधन से साहित्य जगत को गहरी क्षति हुई है। शोक सभा में संजय अवस्थी, ब्रजेश द्विवेदी, अंजनी पाठक, देशपति शुक्ला, शत्रुघ्न सिंह, पवन त्रिवेदी मौजूद रहे। इसके अलावा केडी शर्मा के निधन पर भाजपाइयों ने भी शोक जताया। 
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अमर उजाला ने किया था सम्मानित

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रविवार रात लालगंज में कवि सम्मेलन के दौरान कवि केडी शर्मा ने प्रमोद तिवारी के साथ सेल्फी खींचकर फेसबुक पर पोस्ट की।
वर्ष 2015 में कानपुर में आयोजित हुए अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में अमर उजाला ने अवधी भाषा के कवि केडी शर्मा हाहाकारी को अमर वाणी के पुरस्कार से सम्मानित किया था।  
पत्र पत्रिकाओं में करते थे लेखन
केडी शर्मा अवधी भाषा के साथ ही जीवन का यथार्थ चित्रण भी कविताओं के माध्यम से करते थे। हजारों रचनाएं लिख चुके शर्मा ने अभी तक अपना कोई काव्य संकलन प्रकाशित नहीं कराया था। हालांकि पत्र-पत्रिकाओं में उनकी रचनाएं प्रकाशित होती थीं। उन्नाव की काव्य साधना में प्रकाशित रचना ‘कहां वइसि होली, कहां व दिवाली, कलेंडर की छुट्टी बिताइत है खाली’ प्रकाशित हुई थी। इसके अलावा परिवारिक परिदृश्य पर आधारित रचनाओं में ‘घर-घर मां यहै धारणा है, जब ते बहुरेवा लाई गए, लड़िकऊ गुटुर-गूं करै लाग, यह मउसैवै पुरखिन दाई भै खूब सराही गई थी। 
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 एकुवोट दयि कय समझति हौ का...

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हास्य कवि केडी शर्मा हाहाकारी की पुरानी तस्वीर
अवधी भाषा में कालजयी रचनाओं से लोगों को हंसाने वाले केडी शर्मा ‘हाहाकारी’ काव्य के मंच पर भी नई रचनाओं को गढ़ा करते थे। दो दिन पूर्व एक काव्य मंच पर उन्होंने राजनीति पर कटाक्ष करते हुए नई रचना गढ़ी थी। हालांकि रचना पूरी करने से पहले उन्होंने उसे फेसबुक पर शेयर किया और लोगों से सुझाव मांगे। सुझाव पर अमल करते हुए वह रचना पूरी करते इससे पहले उनका निधन हो गया। अवधी भाषा के हास्य कवि केडी शर्मा हाहाकारी ने साहित्य जगत में कई पुरस्कार जीते। काका हाथरसी पुरस्कार के साथ ही अमर उजाला ने उन्हें अमर वाणी पुरस्कार से सम्मानित किया। इसके अलावा कई अन्य संस्थाओं से वह सम्मानित किए जा चुके हैं।
 एकुवोट दयि कय समझति हौ का रावण मरि जाई,
एकुवोट दयि कय समझति हौ का राम राज्य आ जाई,
एकुवोट दयि कय समझति हौ का आतंकवाद मिटि जाई,
एकुवोट दयि कय समझति हौ का नौकरी घर आ जाई। 
इन पंक्तियों को पूरा करने से पहले ही केडी शर्मा का निधन हो गया।

 
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अब को करिहै ठिठौली

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केडी शर्मा हाहाकारी के घर पर लगी लोगों की भीड़
रायबरेली के लालगंज में कवि सम्मेलन के बाद केडी शर्माको हरदोई के संडीला में सोमवार रात होने वाले कवि सम्मेलन में शामिल होने जाना था। बेटे वेद शुक्ल ने बताया कि होली का पर्व होने से पूरे महीने काव्य पाठ लगे हुए थे। इसके लिए वह पहले से तैयारियां रखते थे। जिले में रमई काका व काका बैसवारी के बाद जनपद में अवधी भाषा की पताका को लेकर चलने वाले केडी शर्मा हाहाकारी का निधन अवधी भाषा के क्षेत्र में अपूर्णनीय क्षति है। 

केडी शर्मा हाहाकारी चर्चित प्रमुख रचनाएं

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हास्य कवि केडी शर्मा हाहाकारी की पुरानी तस्वीर
-गांव गली में चर्चा है, चर्चा शहर और थाने मां, मुलायम सिंह का कहि दीन्हिन मोदी जी के काने मा।
-दस बीस दुकाने हैं जिनकी बंबई औ कलकत्ता मा, उनके लरिका लाइन लगाइन बेरोजगारी भत्ता मा।
-कहां जा रही धर्म संस्कृति, यू देखो कुदरत का खेल, संत महात्मा भी बेंचे सैंपू, साबुन और तेल। 
-उम्र बहत्तर दफा छियत्तर, यहु कैसा परिणाम, हिरणा जैसी जंप भूल गए बापू आसाराम। 
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रचना खूब सराही गई

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हास्य कवि केडी शर्मा हाहाकारी की पुरानी तस्वीर
-केडी शर्मा की एक हजार रुपये में 365 व्यापार पर लिखी गई रचना खूब सराही गई थी।
इस रचना के कुछ अंश...
झंडा बेचो, डंडा बेचो, सड़क किनारे अंडा बेचो
मोती बेचो, चोटी बेचो, बाला-झाला लंगोटी बेचो
बंगलादेसी कोट कमीजें बेचो, बोरी-दरी गलीचे बेचो
सब्जी-फल-छुआरा बेचो, पांच रुपइया में दुई गुब्बारा बेचो
भुट्टा चना मकाई बेचो, चूहा मार दवाई बेचो
हीरो हीरोइन की तस्वीरें बेचो, सोने की नकली जंजीरें बेचो
चाभी वाले गुच्छे बेचो, नकली दाढ़ी-मुंछें बेचो
चूरन कहता इमली बेचो, नींबू वाला पानी बेचो
मेहंदी लिपस्टिक डाई बेचो, बान से बनी चारपाई बेचो
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