एक व्यक्ति विश्वविद्यालय से अपने 400 रुपये वापस लेने के लिए 20 महीने से लड़ाई लड़ रहा है। कहीं सुनवाई न होने पर उसने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर पैसे दिलवाने की गुहार लगाई तो प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने उसकी सुनते हुए डीएम से समस्या से निस्तारण को कहा है।
मानस विहार सर्वोदय नगर इंदिरा नगर लखनऊ निवासी राम प्रकट शुक्ला ने पीएमओ से शिकायत की थी कि बेटी संज्ञा शुक्ला ने कानपुर विश्वविद्यालय से प्राचीन भारतीय इतिहास में एमए की परीक्षा पास की है। उसने माइग्रेशन सर्टिफिकेट के लिए आवेदन किया लेकिन विश्वविद्यालय ने माइग्रेशन के मद की जगह प्रोवीजनल सर्टिफिकेट के मद में पैसा जमा कर लिया और इस कारण माइग्रेशन सर्टिफिकेट भी नहीं दिया।
शिकायत पर राज्यपाल के आदेश पर माइग्रेशन के मद में 25 फरवरी 2015 को दोबारा तीन सौ रुपये जमा कराकर सर्टिफिकेट जारी कर दिया गया। सौ रुपये और जमा कराए गए लेकिन प्रोवीजनल सर्टिफिकेट के मद में जमा कराए रुपये एडजस्ट नहीं किए गए। उन्होंने राज्यपाल से शिकायत की तो राज्यपाल कार्यालय ने कुलपति से चार सौ रुपये वापस करने को कहा लेकिन अभी तक नहीं मिले। राम प्रकट शुक्ला ने पीएमओ से शिकायत की कि यह मामला भ्रष्टाचार का है। पीएमओ ने इसका संज्ञान लेते हुए अपर आयुक्त प्रशासन से शिकायत के निस्तारण को कहा तो उन्होंने 15 नवंबर को डीएम को पत्र लिखा।
आवास विकास कालोनी सत्यम विहार कल्याणपुर की बीना श्रीवास्तव ने पीएम को पत्र लिखकर कहा था कि वह 71 साल की हैं। बीमार रहती हैं। अकेले रहती हैं। पति विनय कुमार इलाहाबाद विद्युत विभाग में काम करते थे। उनके निधन के बाद उनकी पेंशन यूपी ट्रांसमिशन एंड पॉवर कॉरपोरेशन लिमिटेड इलाहाबाद से मिलती है। यह पेंशन कोषागार से उन्हें दी जाती है। दो महीने से पेंशन नहीं मिली। पता चला कि वेरीफिकेशन होना है। इसमें अभी समय लग सकता है। मेरी मदद करें। ऐसी मेरी ही समस्या नहीं है। मेरे जैसे और भी लोग हो सकते हैं। पीएमओ ने इस समस्या को भी सुना और अपर आयुक्त प्रशासन को बीना श्रीवास्तव के ही पत्र पर आदेश जारी किया। उन्होंने डीएम को समस्या के समाधान के लिए लिखा है।
इस तरह पहुंच सकते पीएम और पीएमओ तक
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