बड़े अफसरों के फर्जी साइन बनाकर असलहों के लाइसेंस बांटने जैसा एक और फर्जीवाड़ा सामने आया है। केडीए (कानपुर विकास प्राधिकरण) के चंद घूसखोर बाबुओं ने फर्जी दस्तावेज और फर्जी हस्ताक्षर से जूही और किदवई नगर में प्लाट एलॉट कर दिए।
खुलासे के बाद अब इन पर रिपोर्ट होने जा रही है। आवंटित हुए चार आवासीय प्लाटों के मामले में दोषी पाए गए छह केडीए कर्मचारियों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी। शासन से आदेश आने के बाद केडीए के संयुक्त सचिव और अधिशासी अभियंता ने सोमवार को स्वरूप नगर थाने में तहरीर दी है।
केडीए की जूही योजना के डब्ल्यू-2 ब्लॉक, किदवई नगर के एच ब्लॉक और विराट नगर स्थित सात प्लाटों का आवंटन 1990 के दशक में किया गया था। 2006 में इन प्लाटों की रजिस्ट्री भी करा ली गई। दो वर्ष पहले भाजपा विधायक अशोक चंदेल ने इन प्लाटों के फर्जी तरीके से आवंटन की शिकायत की थी।
शासन के निर्देश पर केडीए ने प्लाटों के आवंटन की जांच शुरू कराई थी। एक ही दस्तावेज और फर्जी हस्ताक्षर जांच समिति ने पाया कि सातों प्लाटों के आवंटन में एक ही दस्तावेज की फोटोकॉपी लगाई गई और चार प्लाटों के कागजों पर फर्जी हस्ताक्षर किए गए। केडीए ने फर्जी रजिस्ट्री कराने वालों के खिलाफ एफआईआर कराई थी। बाकी तीन प्लाटों में से दो के केस कोर्ट में चल रहे हैं। एक के आवंटन को विधान परिषद की समिति ने सही माना था।