कानपुर। खलासी लाइन स्थित शास्त्री भवन में रविवार को ''''डेढ़ इंच ऊपर'''' और ''''सुख का पेड़'''' नाट्य के मंचन ने दर्शकों को भावुक कर दिया। कलाकारों ने अभिनय से ऐसा समां बांधा, जिसको लोग आखिर तक टकटकी लगाए देखते रहे। हर संवाद और उसके साथ संगीत की जुगलबंदी पर जमकर तालियां बजीं। कलाकारों ने सुख-दुख, जीवन-मरण, अपने-पराए के द्वंद्व से रूबरू कराकर जिंदगी का वास्तविक आईना दिखाया।
यह कार्यक्रम सामाजिक संस्था नाट्य वास्तु और रोमी अड्डा के सहयोग से ''''आओ कहानी देखें'''' कार्यक्रम के अंतर्गत हुआ। निर्मल वर्मा की ''''डेढ़ इंच ऊपर'''' नाट्य में द्वितीय विश्व युद्ध की त्रासदी, तानाशाही और अंतरंग जीवन को दर्शाया गया। प्रियंवद की ''''सुख का पेड़'''' के जरिये संदेश दिया गया कि कोई दुख इतना बड़ा नहीं होता, जिसमें पूरा जीवन समा जाए। सारे सुख जीवन के अंदर ही होते हैं। केवल सपना ही जीवन के ऊपर होता है। वरिष्ठ रंगकर्मी डॉ. मीत कमल और प्रवीण कुमार अरोड़ा ने सशक्त अभिनय किया। निर्देशन राजेश का रहा। वरिष्ठ साहित्यकार प्रियंवद, मौली सेठ आदि मौजूद रहीं।