गंगाजल से प्रदूषण दूर करने के लिए पिछले चार साल में तरह-तरह की योजनाएं बनाई गईं, लेकिन इस बीच धरातल पर कुछ भी नजर नहीं आया। नालों को टैप करने, टेनरियों में जेडएलडी लगाने, ऑन लाइन मॉनीटरिंग सिस्टम अपडेट करने, कई एसटीपी का बनाने, जैसी कई योजनाओं को तैयार किया गया। इसके लिए बजट भी बनाया गया, कुछ बजट जारी भी हुआ लेकिन कोई ठोस काम नजर नहीं आया।
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गंगा को प्रदूषण मुक्ति के लिए 600 करोड़ की योजना
केंद्र सरकार ने कानपुर में गंगा प्रदूषण दूर करने और घाटों को विकसित करने के लिए 600 करोड़ की योजना तैयार की है। इसका शुभारंभ भी यहां गंगा किनारे किया गया। अभी इसमें सिर्फ घाटों के सुंदरीकरण का कार्य क रने की योजना बनी थी, शुरुआत के बाद यह काम भी ठप पड़ा है।
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शहर के 11 नालों को टैप करने की थी योजना
गंगा में छोटे बड़े करीब 24 नाले गिर रहे हैं। करीब 10 वर्ष पहले इसमें से 11 नालों को टैप करने की बात कही गई थी, लेकिन यह व्यवस्था कारगर नहीं रही। इस मसले को एनजीटी के जरिये भी कई बार उठाया जाता रहा है। पिछले कुछ दिनों से केंद्र और प्रदेश सरकार के बीच इन नालों को गंगा में जाने से रोकने के लिए बहस चल रही है।
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हर जिले में ग्राम स्तर तक होगा समितियों को गठन करने की घोषणा
गंगा की सुरक्षा का बीड़ा अब उसके किनारे रहने वाले लोग ही उठाएंगे। प्रदेश से लेकर ग्रामीण स्तर तक की गंगा समितियां गठित की जाएंगी। यह समिति गंगा के किनारे पौधे लगाएंगी, घाटों को सुंदर बनाएंगी साथ ही गंगा यात्रा भी निकालेंगी। नमामि गंगे कमेटी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में लिए गए फैसले के अनुसार यह कार्य 15 जुलाई से शुरू हो जाएगा। इससे पहले शिलान्यास कार्यक्रम होंगे। वर्तमान में यह कमेटियां औपचारिक होकर रह गई हैं।
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गंगा सफाई के लिए आई थी स्किमर मशीन वापस
गंगा की सफाई करने के लिए कें द्र सरकार ने स्किमर मशीन मंगाई थी, कुछ दिनों के बाद वह वापस हो गई। कहा गया था तीन महीने बाद इसे फिर से लाया जाएगा। अब छह महीने होने जा रहे हैं, अभी तक मशीन का पता नहीं है। कचरा लगातार घाटों पर बढ़ रहा है।
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गंगा किनारे स्थापित हैं 450 टेनरियां
कानपुर महानगर में गंगा किनारे इस समय कुल 450 टेनरियां स्थापित हैं। इनसे निकलने वाले हानिकारक तत्व युक्त पानी का ट्रीटमेंट करने के लिए यहां पर काफी समय पहले सीईटीपी (कॉमन इफ्लएंट ट्रीटमेंट प्लांट) की स्थापना की गई थी। आज के समय में वह पर्याप्त नहीं है। इसके अलावा 11 बड़े नालों से शहर का सीवर भी गंगा में रोजाना गिरता है। जिससे गंगा का प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है।