आमिर खान की फिल्म ‘दंगल’ में गीता फोगाट के बचपन का रोल अदा करने वाली कश्मीर की जायरा वसीम का फोगाट बहनों ने खुलकर समर्थन किया है। सोमवार को कानपुर आईं दोनों बहनों ने कहा कि जायरा को कट्टरपंथियों और अलगाववादियों के सामने झुकना नहीं चाहिए था बल्कि एक रेसलर की तरह उनके खिलाफ डटकर खड़े रहना चाहिए था। कहा कि वे दोनों जायरा के हर कदम पर साथ हैं। उसे लगातार मैसेज भी कर रही हैं लेकिन उसकी ओर से कोई जवाब नहीं आ रहा है।
असली हीरो पिता महावीर सिंह
मैनावती मार्ग स्थित जीडी गोयनका स्कूल में मतदाता जागरूकता कार्यक्रम में आईं फोगाट बहनों ने कहा कि सरकार को खेलों के लिए अधिक बजट जारी करना चाहिए। खिलाड़ियों को पूरी सुविधाएं मिलेंगी तो देश के खाते में और पदक बढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि अपने देश मेें क्रिकेट ही ज्यादा देखा और पसंद किया जाता है। कुछ ऐसे प्रयास होने चाहिए, जिससे सभी खेलों को पहचान मिले। कहा कि कॉमनवेल्थ में गोल्ड (गीता को) और सिल्वर (बबिता को) पदक उन्होंने जीता जरूर है लेकिन जीत के असली हीरो उनके पिता महावीर सिंह हैं। उन्हें पहचान फिल्म ‘दंगल’ से मिली है।
आरक्षण मिले लेकिन दंगा फसाद गलत
फोगाट बहनों ने हरियाणा में आरक्षण का समर्थन किया है। हालांकि यह भी कहा कि आरक्षण की मांग को लेकर दंगा फसाद करना, ट्रेन रोक देना ये सब गलत है। कार्यक्रम में डीएम कौशल राज शर्मा, सीडीओ अरुण कुमार, एडीएम एलए समीर वर्मा, स्कूल के चेयरमैन चंदन अग्रवाल मौजूद रहे।
यह था जायरा प्रकरण
कश्मीर में रहने वाली जायरा द्वारा फिल्म में अभिनय किए जाने का कट्टरपंथियों ने विरोध किया था। फिल्म वगैरह में काम करना धर्म के खिलाफ बताकर आक्रोश भी जताया था। पहले तो जायरा ने सोशल मीडिया पर कट्टरपंथियों के खिलाफ खुलकर लिखा था। बाद में इसे अपनी गलती मानते हुए पीछे हट गई थी।
ओलंपिक में मेडल जीतकर पापा का सपना पूरा करना मकसद
गीता और बबिता हरियाणा के भिवानी जिले की रहने वाली हैं। कॉमनवेल्थ (2010) में देश के लिए पहला गोल्ड मेडल जीतने के साथ ही गीता ओलंपिक क्वालीफाई करने वाली पहली भारतीय महिला रेसलर भी हैं। पिता महावीर सिंह भी एमेच्योर रेसलर और ओलंपिक में कोच रह चुके हैं। उन्हें भारत सरकार की ओर से द्रोणाचार्य अवार्ड भी मिल चुका है। आमिर खान की फिल्म ‘दंगल’ उन्हीं के जीवन पर आधारित फिल्म है। फोगाट बहनों का कहना है कि उनका असली मकसद ओलंपिक में पदक जीतना। तभी पापा का सपना पूरा होगा।
बापू किसके हानिकारक हैं...
फोगाट बहनों ने बच्चों से सवाल पूछा ‘बापू किसके हानिकारक हैं’...। यह सुनते ही स्कूल के बच्चे चुप हो गए। तब उन्होंने कहा कि बापू किसी के हानिकारक नहीं होते हैं। उनकी डांट के पीछे एक मकसद होता है। आप पढ़ाई के साथ खेलों पर भी ध्यान दें। यह एक ऐसा माध्यम होता है, जिससे आप अपना, माता-पिता, स्कूल, शहर, राज्य और देश का नाम रोशन कर सकते हैं।