मनमानी से नहीं मिलती हैं बेहतर सुविधाएं
फार्मासिस्ट आलोक प्रजापति हैं, जो अभी मौजूद नहीं हैं। वह लोग कब आएंगे वही बता सकते हैं। वहीं पीएचसी में मरीज के बेड बिना चादर के मिले। वहीं जिन जगहों पर चादर मिली वह गंदी मिली। वहीं, जहां स्टॉफ बैठता है...उन कुर्सियों पर साफ सुथरी तौलिया मिली। ऐसे में स्टॉफ की मनमानी से बेहतर सुविधाओं का लाभ नहीं मिल रहा है।
बुखार है डॉक्टर का कर रहे इंतजार
भैंस्ता निवासी निर्मला ने बताया कि वह बुखार से पीड़ित हैं वह अपने पति के साथ दिखाने आई हैं लेकिन यहां डॉक्टर मौजूद नहीं हैं जिससे उनके आने का इंतजार कर रहे हैं।
शहरी पीएचसी में स्टाफ न बैठने की जानकारी नहीं हैं । अगर स्टाफ समय से नहीं पहुंच रहा है स्पष्टीकरण लेकर कार्रवाई की जाएगी। सुविधाओं को बेहतर किया जाएगा। -डॉ. गीतम सिंह, मुख्य चिकित्साधिकारी हमीरपुर
पौथिया सीएचसी में डॉक्टर के आने का इंतजार करते रहे मरीज
पौथिया गांव के नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में शुक्रवार को 10:45 बजे तक डॉक्टर नहीं पहुंचे। फार्मासिस्ट के भरोसे मरीज रहे। रामखिलावन ने बताया की जिस दिन फार्मासिस्ट छुट्टी चले जाते हैं, तो समय से नहीं खुलता अस्पताल। मजबूरी में प्राइवेट अस्पतालों में जाना पड़ता है।
मरीज बोले- हमने फार्मासिस्ट से इलाज कराया
डॉक्टर अर्चना प्रजापति व स्टॉफ नर्स अन्न पूर्णा सचान व वार्ड ब्वाय शैलेंद्र कुमार भी नदारद मिले। फार्मासिस्ट रामसागर 17 मरीज देख चुके थे। कीरतपुर की रानी, पुनिया ,पौथिया गांव की कुशमा व शांति ने बताया डाक्टर साहब के कमरे की कुर्सी खाली थी पड़ी थी, तभी हमने फार्मासिस्ट से इलाज कराया है।
सबने बताए हैं अपने-अपने कारण
फार्मासिस्ट रामसागर ने बताया डॉक्टर के बच्चे की तबियत खराब होने के कारण अस्पताल नहीं आईं हैं। उधर एएनएम कल्पना सिंह ने बताया की शुक्रवार को कैंप से बिजली खराब होने के कारण अस्पताल में अंधेरा रहा मोबाइल फोन की रोशनी से दो प्रसव कराए गए।
इलाज की कहानी मरीजों की जुबानी
जनपद बांदा के गडरिया गांव से आई वनदेवी कहती हैं कि करीब 40 किलो मीटर दूर से चलकर इलाज कराने आए थी। बताया कि सुबह करीब नौ बजे अस्पताल आ गई थी। डेढ़ घंटे लाइन में लगने के बाद चिकित्सक को दिखा पाई। एक बजे ब्लड जांच कराने पहुंची, जिसकी जांच तक नसीब नहीं हो सकी है।
प्राइवेट लैब में महंगे दामों में जांच करानी पड़ती है
कलौलीतीर निवासी गर्भवती अंजनी ने बताया कि नाम का जिला अस्पताल है। जो भगवान भरोसे संचालित किया जा रहा है। अस्पताल में न ही कोई चिकित्सक हैं और न ही मरीजों को कोई जांच की सुविधा है। कहा कि अल्ट्रासाउंड जांच नौ महीने से ठप है। जिसके लिए प्राइवेट लैब में महंगे दामों में जांच करानी पड़ती है।
सापेक्ष काफी पद हैं खाली
प्रभारी सीएमएस डॉ. राजीव गुप्ता ने बताया कि स्वीकृति पद के सापेक्ष काफी पद रिक्त हैं। कहा कि तीन महिला चिकित्सकों की तैनाती है। जिनमें डॉ. अंजना पिछले बुधवार से लगातार तीन पारियों में ड्यूटी करती रही। वहीं डॉ. साधना त्रिपाठी रात पाली में ड्यूटी करती रही।
अल्ट्रासाउंड की जांचें तक नहीं हो पा रही हैं
वहीं, डॉ. प्रतीक्षा सिंह ने ओपीडी संभाली है। उन्होंने कहा कि रेडियोलॉजिस्ट का पद वर्षों से रिक्त हैं। पिछले वर्ष अक्तूबर माह से अल्ट्रासाउंड की जांचे नहीं हो पा रही हैं। जिसकी शासन से मांग लगातार की जा रही है। बताया कि सीएमएस डॉ. फौजिया अंजुम छुट्टी पर हैं।
रेडियोलॉजिस्ट व चिकित्सकों की कमी तो पूरे प्रदेश में चल रही है। कहा कि जिसके लिए वह शासन स्तर पर मांग करेंगे। कहा कि ओपीडी में सभी चिकित्सकों को बैठने के लिए निर्देशित किया जाएगा। -गीतम सिंह, सीएमओ