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यूपीएफसी में भी हो चुका पीएफ घोटाला, सभी कर्मियों को सेवानिवृत्ति पर पीएफ का भुगतान मिलना भी मुश्किल

Fri, 08 Nov 2019 01:05 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा यूपी डेस्क, अमर उजाला, प्रदीप अवस्थी
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घोटाला - फोटो : amar ujala
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बिजली विभाग के कर्मचारियों के पीएफ की राशि डीएचएफएल में निवेश के नाम पर हुए घोटाले की तरह ही उत्तर प्रदेश वित्तीय निगम (यूपीएफसी) में भी पीएफ घोटाला हो चुका है। यूपीएफसी के अफसरों ने लखनऊ के जिस सिटी कोआपरेटिव बैंक में संस्थान के कर्मियों की पीएफ राशि का निवेश किया, वह बैंक अब डूब चुका है।
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मामला लिक्वीडेशन में है। इस घोटाले में यूपीएफसी को 10 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ था। अब सभी कर्मियों को सेवानिवृत्ति पर पीएफ का भुगतान मिलना भी मुश्किल है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक मामला इतना पुराना है कि अफसरों की स्मृतियों और फाइलों में धूल का गुबार जम चुका है।

 
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नव नियुक्त प्रबंध निदेशकों को बार बार याद दिलाए जाने के बावजूद अब तक इस प्रकरण की कोई जांच पड़ताल नहीं हुई। वर्ष 1996-97 में यूपीएफसी के तत्कालीन अफसरों ने मोटे कमीशन के लालच में गोमती नगर, लखनऊ के सिटी कोआपरेटिव बैंक में संस्थान के कर्मचारियों का आठ करोड़ 40 लाख रुपये का निवेश करा दिया था।

उस समय इस बात का व्यापक विरोध हुआ था कि सिटी कोआपरेटिव बैंक न तो अनुसूचित बैंक है न ही राष्ट्रीयकृत, फिर इसमें निवेश क्यों किया जा रहा है। इस विरोध को दरकिनार करते हुए तत्कालीन अफसरों ने एक सहकारी बैंक में पैसा लगा दिया। कुछ वर्षों बाद यह बैंक डूब गया। निवेश की हुई धनराशि वापस नहीं मिली। बैंक इस समय लिक्वीडेशन में है। यूपीएफसी के रिकार्ड के मुताबिक 31 मार्च 2018 तक कर्मचारी भविष्य निधि ट्रस्ट को कुल 10.45 करोड़ का घाटा हुआ। 

 
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देर से रिटायर होने वालों को नहीं मिलेगा भुगतान
कर्मचारी भविष्य निधि ट्रस्ट की धनराशि सिटी कोआपरेटिव बैंक में डूबने के बाद रिटायरमेंट से पहले ही बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने 75 फीसदी धनराशि निकाल ली है। स्थिति ये है कि 2020 के बाद रिटायर होने वाले कर्मचारियों को उनका जमा पीएफ भी नहीं मिलेगा। 

कार्रवाई के नाम पर जब्त हुए तीन करोड़ के बांड
सिटी कोआपरेटिव बैंक ने यूपीएफसी से तीन करोड़ रुपये कीमत के बांड ले रखे थे। बैंक डूबने के बाद पीएफ की राशि भी डूबी तो कार्रवाई के नाम पर सिटी कोआपरेटिव बैंक के बांड जब्त कर लिए गए। इसके बाद इस प्रकरण पर कोई जांच या फिर कार्रवाई नहीं हुई। 

पीएफ घोटाले की शिकायत बीते 10 वर्ष से संस्थान के हर प्रबंध निदेशक से की गई। चूंकि वे अतिरिक्त प्रभार वाले अधिकारी होते हैं, इसलिए ऐसे प्रकरणों को गंभीरता से नहीं लेते। अब नए प्रबंध निदेशक से भी शिकायत की गई है। देखना है कि इस बार क्या होता है। 
राजेंद्र गौतम, महामंत्री, यूपीएफसी कर्मचारी संघ 
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