जाजमऊ में अभी भी लोग नाक और मुंह दबाने को मजबूर हैं
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कानपुर के जाजमऊ में सपा नेता महताब आलम की ढही अवैध इमारत में और शव दबे होने की आशंका में नेशनल डिजास्टर रेस्क्यू फोर्स (एनडीआरएफ) ने फिर से ऑपरेशन शुरू कर दिया है। मांस की सड़ांध से परेशान इलाकाई लोगों की शिकायत पर लाशें खोजने का अभियान फिर शुरू हुआ है।
मलबे से आ रही दुर्गंध और श्रमिकों के परिजनों की ओर से उनके लापता होने की बात से इस आशंका को बल मिल रहा है। दुर्गंध आने पर हादसा स्थल के चारों ओर गैमेक्सीन पाउडर का छिड़काव किया गया। मलबा हटाने में जुटी टीमों ने मंगलवार देर शाम तक अभियान चलने की बात कही है।
शुक्रवार को एनडीआरएफ ने कैमरों और सेना ने प्रशिक्षित डॉग्स की जांच के बाद मलबे में किसी शव या घायल श्रमिक के न होने की बात कहते हुए साइट को क्लीअर घोषित किया था। हालांकि अगले ही दिन से स्थानीय निवासियों ने दुर्गंध की शिकायत शुरू कर दी थी। इस पर जिला प्रशासन की मांग पर एनडीआरएफ को दोबारा बुला लिया गया है।
एनडीआरएफ के डिप्टी कमांडेट नरेंद्र ने बताया कि दुर्गंध आने की जानकारी पर स्पॉट की दोबारा जांच की गई। इसके बाद सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने का फैसला लिया गया। अब पूरा मलबा हटने तक टीमें काम करेंगी। यहां दो टीमें मौजूद हैं। इसमें 45-45 सदस्य मौजूद हैं।
1 फरवरी बुधवार की दोपहर हुआ था हादसा
बुधवार 1 फरवरी को कानपुर के जाजमऊ में छह मंजिला निर्माणाधीन इमारत गिरने से 10 मजदूरों की मौत हो गई थी। जबकि 50 से ज्यादा गंभीर रूप से घायल हो गए। निर्माणाधीन इमारत में हादसा उस वक्त हुआ जब सातवीं मंजिल के लिए स्लैब पड़ रहा था। जिस वक्त हादसा हुआ वहां पर इमारत के मालिक और समाजवादी पार्टी के पूर्व जिलाध्यक्ष महताब आलम मौजूद नहीं थे। मलबे में अभी काफी लोगों के फंसे होने की आशंका है।