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Kanpur News: बदुवापुर गांव में शादी करने से कतराते लोग

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कानपुर। कूड़ा निस्तारण प्लांट के बगल में स्थित ग्राम बदुवापुर के निवासी 16 साल से जहरीली हवा में सांस लेने और घुट-घुट कर जीने के लिए मजबूर हैं। बदुआपुर में मक्खियों का प्रकोप बढ़ने से खाना-पीना दूूभर हो गया। दर्जनों लोग बीमार हुए। दो साल पहले ग्रामीणों ने इसी वजह से दो वृद्धों की मौत होने का आरोप लगाया था। लोग इस गांव में अपनी बेटी का विवाह करने से कतरा रहे हैं।
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नासूर बनी इस समस्या से आजिज तमाम परिवार पलायन कर गए हैं। ट्रांसपोर्टरों ने भी प्लांट से सटी न्यू ट्रांसपोर्टनगर योजना में शिफ्ट होने से इन्कार कर दिया। हाईवे से निकलने में भी सांस लेना दूभर रहता है। भूगर्भ जल प्रदूषित होने के साथ ही गंदा पानी, कूड़ा पांडु नदी में जाता है। नगर निगम के प्रयास से अब ग्रामीणों में समस्या से निजात मिलने की आस बंधी है।अमर उजाला ने 46 एकड़ में बने इस प्लांट के बगल में स्थित बदुवापुर गांव में शुक्रवार को ग्रामीणों से बात की तो उन्होंने समस्याएं बताईं।

चार माह पहले बदुवापुर में मेरी शादी हुई है। यहां कूड़ा निस्तारण प्लांट से दिनरात बदबू आती है। घर में इतनी ज्यादा मक्खियां उड़ती हैं, जिनसे जीना हराम हो गया है। पति से कहीं और चलकर रहने के लिए आग्रह किया, पर वह बुजुर्ग माता-पिता का हवाला दे देते हैं।
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- अंशिका सिंह
कूड़ा निस्तारण प्लांट में नवनिर्मित कारकर यूटिलिटी प्लांट में मवेशियों के शवों के निस्तारण के दौरान आसपास भीषण बदबू आती है, जिससे ग्रामीणों को उल्टियां होने लगती हैं। कई लोग बीमार हैं। लोग धुआं, बदबू भरने के डर से घरों में पंखे, कूलर नहीं चलाते।
- रामकली
सालों से इस प्लांट के नर्क में जी रहे हैं। हमारे परिवार के कुछ लोग पलायन कर गए हैं। हमारी माली हालत ठीक नहीं है। इस वजह से दूसरी जगह व्यवस्था नहीं कर पा रहे।
- सरवन, बदुवापुर गांव
लोग रिश्ता लेकर गांव आते हैं, पर जैसे ही बदबू आती है तो उल्टे पांव वहीं से लौट जाते हैं। इस वजह से गांव के तमाम युवकों की शादी नहीं हो पाई। दमघोंटू धुएं और बदबू की वजह से आसपास के गांवों से लेकर पनकी तक के लोगों का सांस लेना दूभर हो जाता है।
- ऊषा
काफी प्रयास के बाद भी शादी में परेशानी होने के कारण हमारे परिवार के शिव भजन सिंह, सुशीला, सुशील भदौरिया, अंशु देवी गांव से दूर कपली सुजानपुर, कांशीराम कॉलोनी पर रहने चले गए। वहीं अपने बच्चों की शादी की।
- अनारकली
कूड़ा निस्तारण प्लांट के बगल में स्कूल होने के कारण अभिभावक अपने बच्चों को लेकर आते हैं, लेकिन बदबू और मक्खियों की वजह से एडमिशन नहीं करते। नगर निगम ने स्कूल की तरफ छह महीने पहले टूटी प्लांट की बाउंड्री नहीं बनवाई।
- शालिनी भट्ट, मैनेजिंग डायरेक्टर, रामलखन भट्ट इंटर कॉलेज, पनकी भऊसिंह

प्रयागराज भदौरिया, सुरेंद्र सिंह, इंद्रपाल, बाबू सिंह, छोटे सिंह, भगवान, कमल, विजय, कमल, सुरेंद्र सेंगर सहित कई अन्य ग्रामीण परिवार सहित गांव छोड़कर रतनपुर डूडा कॉलोनी, काशीराम कॉलोनी जाकर बस गए हैं, जबकि कुछ पैतृक गांव चले गए हैं।
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