कानपुर देहात। बैंक खाते में अपनी जमा पूंजी रखने वाले 98 फीसदी लोग डेबिट व क्रेडिट कार्ड का उपयोग करना नहीं जानते हैं। कार्ड का उपयोग करने के दौरान छोटी-छोटी चीजों को ध्यान में न रखने से लोग साइबर ठगी का शिकार हो जाते हैं। यह बात माती स्थित ईको पार्क में हुई साइबर सुरक्षा कार्यशाला में साइबर एक्सपर्ट राहुल मिश्रा ने कही। पुलिस ने डिजिटल युग में बढ़ते साइबर अपराधों के रोकथाम व लोगों को साइबर अपराधों से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से यह कार्यशाला आयोजित की थी।
गोष्ठी में साइबर एक्सपर्ट राहुल मिश्रा ने बताया कि डेबिट कार्ड व क्रेडिट कार्ड में आपका कार्ड नंबर, सीवीवी आदि की गोपनीय जानकारी दी गई होती है। आपकी नजर में एटीएम मशीन, पेट्रोल पंप आदि जगह पर कार्ड का प्रयोग करने के दौरान सिर्फ पिन को छिपा कर भरने से भी आप सुरक्षित नहीं हैं। ठग एटीएम की स्किमिंग डिवाइस के ऊपर एक दूसरी डिवाइस लगा देते हैं। ऐसे में कार्ड का प्रयोग करने से ठग आपके कार्ड की चिप, सीवीवी आदि की वर्चुअल कॉपी निकाल लेता है। साथ ही डायलर पैड के ऊपर फर्जी पैड लगाने या कैमरे के जरिये आपका पिन भी चोरी कर लेता है। इसके बाद वह डुप्लीकेट कार्ड बनाकर आपकी जमापुंजी पर डाका डाल सकता है।
उन्होंने बताया की क्रेडिक कार्ड प्रयोग करने वाले लोग ध्यान रखें कि अपने कार्ड की इंटरनेशनल ट्रांजेक्शन सुविधा को बंद रखें। इंटरनेशनल ट्रांजेक्शन में ओटीपी के बिना ही ट्रांजेक्शन किया जा सकता है। इसके अलावा उन्होंने ओटीपी ठगी, सुरक्षित पासवर्ड प्रबंधन, सोशल इंजीनियरिंग, फेक लिंक और डिजिटल भुगतान से जुड़ी ठगी के तरीकों की गहन जानकारी दी। साथ ही लाइव डेमो दिखा कर साइबर ठगी से बचने की तरकीब सिखाई।
मुख्य अतिथि एडीजी आलोक सिंह ने कहा कि साइबर जागरूकता आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। पुलिस आम नागरिकों तक साइबर सुरक्षा के मूल सिद्धांत पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। हर नागरिक को अपने मोबाइल, बैंकिंग ऐप्स और सोशल मीडिया अकाउंट्स की सुरक्षा का ध्यान रखना चाहिए, ताकि ठगों के जाल में न फंसें। डीआईजी हरीश चंदर ने कहा कि पुलिस लगातार तकनीकी उन्नयन कर रही है ताकि साइबर अपराधों की जांच एवं निवारण अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सके।
कार्यक्रम में पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण ने भी वर्चुअल माध्यम से लोगों को साइबर क्राइम के संबंधित जानकारी दी। कहा कि आधुनिक तकनीक जहां जीवन को सुगम बना रही है, वहीं साइबर अपराधी इसका दुरुपयोग कर भोले-भाले नागरिकों को ठगने के नए तरीके खोज रहे हैं। उन्होंने लोगों से अपील की है कि ओटीपी, बैंक विवरण, पासवर्ड या निजी जानकारी किसी से भी साझा न करें, और किसी भी संदिग्ध लिंक या कॉल से सतर्क रहें। यहां एसपी श्रद्धा नरेंद्र पांडेय, सीडीओ लक्ष्मी एन, एएसपी राजेश पांडेय, सीओ सदर संजय वर्मा, सीओ सिकंदरा प्रिया सिंह, सीओ यातायात आलोक कुमार, सीओ डेरापुर राजीव सिरोही, स्कूली छात्र-छात्राएं, उद्यमी, जनप्रतिनिधि व आम नागरिक मौजूद रहे। साथ ही कानपुर मंडल के थानों की पुलिस भी वर्चुअल माध्यम के कार्यशाला में जुड़ी।
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सेवक के तौर पर प्रयोग करें मोबाइल : एसपी
कानपुर देहात। कार्यशाला के दौरान पुलिस अधीक्षक श्रद्धा नरेंद्र पांडेय ने कहा कि मोबाइल का निर्माण लोगाें की सहूलियत के लिए किया गया था। आधुनिकता के बढ़ते दौर में मोबाइल लोगों को अपना गुलाम बनाता जा रहा है। कहा कि मोबाइल या किसी अन्य गैजेट को सेवक के रूप में उपयोग करें ना कि स्वयं उसके गुलाम बन जाएं। मोबाइल के जरिये आपराधिक प्रवृत्ति के लोग आपके बच्चों को इसी मोबाइल के जरिये दुष्प्रेरित कर कुछ भी करवा सकते हैं। कहा कि हम लोग समान्यता देखते हैं कि लोग बच्चों के रोने पर उसे यूट्यूब या कोई सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर वीडियो प्ले करके दे देते हैं। इसके बाद यह भी नहीं देखते कि बच्चा क्या देख रहा है। सोशल मीडिया पर आत्महत्या के दुषप्रेरण या आपराधिक गतिविधियों के भी वीडियो रहते हैं। जोकि बच्चे का ब्रेनवॉश भी कर सकते हैं। बच्चों को आजादी दें, उनसें दोस्त बनकर उनकी कमियां जानें और उन्हें दूर करें। न कि बच्चों को डांटे, जिससे वह अपनी मुसीबत भी आपको न बता सके। (संवाद)