आईसीयू यानी इंटेसिव केयर यूनिट (सघन चिकित्सा कक्ष) में गंभीर मरीजों को अति सतर्कता-सुरक्षा के साथ रखा जाता है, कोई व्यक्ति जूते-चप्पल तक पहनकर अंदर नहीं जा सकता क्योंकि इससे इन्फेक्शन का खतरा रहता है। आईसीयू एयर टाइट रहता है ताकि बाहर की प्रदूषित हवा अंदर गंभीर मरीजों तक न पहुंच सके। ऐसे में हैलट मेडिसिन आईसीयू में एसी प्लांट फेल हो जाने पर गुरुवार को खिड़की-दरवाजे तक खोल दिए गए। सवाल उठता है कि ऐसा करके क्या जान-बूझ कर मरीजों का जीवन संकट में नहीं डाल दिया गया।
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फाइल फोटो
आधुनिकता के युग में क्या बाबा आदम के जमाने का यह तरीका अपनाना बुद्धिजीवी लोगों (डॉक्टर) की बुद्धिमानी थी। अब आईसीयू में दरवाजे, खिड़कियां खोलने से बैक्टीरिया का घनत्व बढ़ गया है। विशेषज्ञों के अनुसार इससे मरीजों को भी संक्रमण का खतरा है। कालेज प्रशासन आईसीयू को बैक्टीरिया फ्री बनाने के लिए एक - दो दिन में फ्यूमीगेशन (बैक्टीरिया मुक्त) कराने की बात कह रहा है।
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तापमान बढ़ने से बंद हो सकते हैं चिकित्सा उपकरण
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विशेषज्ञों के अनुसार आईसीयू का एसी प्लांट खराब होने से तापमान बढ़ने लगता है। शुरुआत में वहां मौजूद मरीजों, तीमारदारों, डाक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ को घुटन, सांस लेने में तकलीफ होती है, फिर उनके शरीर का तापमान बढ़ने लगता है। उदाहरण के तौर पर यदि किसी मरीज को 101 फॉरेनहाइट तापमान में भर्ती कराया गया हो तो उसका तापमान बढ़कर 105 - 106 फॉरेनहाइट पहुंच सकता है। इससे उसकी अन्य तकलीफें भी बढ़ जाती हैं और इलाज करना मुश्किल हो जाता है। इतना ही नहीं तापमान बढ़ने से एबीजी (आर्टरियल ब्लड गैसेस) मशीन ठीक से काम नहीं करती है। वेंटीलेटर में तापमान को नियंत्रित करने वाले थर्मोस्टेट ट्रिप करने लगते हैं। इससे इनका नियंत्रित, क्रियाशीलता और रीडिंग प्रभावित हो सकती है, जिसका खामियाजा मरीज को भुगतना पड़ सकता है। उसकी जान तक जा सकती है। डी-फ्रेबिलेटर मशीन, मॉनीटर ट्रिप करने, बंद होने या फुंकने का खतरा रहता है।
आईसीयू का दरवाजा, खिड़कियां खोलने से संक्रमण
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एसी आईसीयू की गंदी हवा खींचता है और फिल्टर्ड एयर छोड़ता है। इससे आईसीयू में बैक्टीरिया कम होते रहते हैं। इसके विपरीत एसी बंद होने से बैक्टीरिया का घनत्व बढ़ने लगता है। इतना ही नहीं हैलट मेडिसिन आईसीयू में जिस प्रकार दरवाजे और खिड़कियां खोल दिए गए थे, उससे वहां बैक्टीरिया का घनत्व बहुत बढ़ गया होगा। ऐसे आईसीयू में मरीजों को भी संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। मेडिसिन आईसीयू के इंचार्ज डा. सौरभ अग्रवाल का दावा है कि एसी खराब होने के बावजद वेंटीलेटर, मॉनीटर सहित सभी चिकित्सा उपकरण सामान्य रूप से काम करते रहे। इस वजह से किसी मरीज की मौत नहीं हुई।
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लिया सबक, होगी दोहरी व्यवस्था
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मेडिकल कालेज प्रशासन ने इस हादसे से सबक लिया। प्राचार्य डा. नवनीत कुमार ने बताया कि आईसीयू में एसी की दोहरी व्यवस्था की जाएगी। एक एसी प्लांट चलेगा और दूसरा वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में रहेगा। ताकि उन्हें एक - एक कर चलाया जाता रहे और यदि एक खराब हो जाए तो तुरंत दूसरे एसी प्लांट से आईसीयू में सामान्य कूलिंग उपलब्ध होती रहे।
मेडिकल कालेज प्रशासन ने आईसीयू में एसी की दोहरी व्यवस्था, ओपीडी ब्लाक में सेंट्रली एसी, ओपीडी ब्लाक की मरम्मत, वार्डों एवं शौचालयों की मरम्मत के लिए 7 करोड़ का प्रोजेक्ट तैयार किया है। मेडिकल कालेज के अवर अभियंता (विद्युत) विनय अवस्थी ने बताया कि यह प्रस्ताव पिछले महीने ही शासन को भेजा जा चुका है। स्वीकृति मिलते ही इसे मूर्तरूप दिया जाएगा।