कानपुर। गलन भरी ठंड में बहुत से रोगी अस्पताल पहुंचने के पहले ही दम तोड़ दे रहे हैं। गुरुवार को एलपीएस कार्डियोलॉजी इंस्टीट्यूट में सीजन के सबसे अधिक 13 ब्रॉट डेड रोगी पहुंचे। इसी तरह हैलट इमरजेंसी में ब्रेन हेमरेज के दो रोगी मृतावस्था में लाए गए। रात आठ बजे तक ब्रेन स्ट्रोक के 13 रोगी आए जिनमें 10 के मस्तिष्क की नसें फट गई थीं। इन रोगियों को नाजुक हालत में भर्ती किया गया। चिकित्सकों के अनुसार बीपी की दवा छोड़ना मरीजों के लिए खतरनाक हो रहा है, इससे ही दिमाग की नसें फट रही हैं।
कार्डियोलॉजी में मृत हालत में आने वाले रोगियों में 40 से 50 साल आयु वर्ग के रोगी अधिक हैं। वहीं ब्रेन हेमरेज के रोगियों में अब 40 साल से कम आयु वर्ग वाले भी आ रहे हैं। एलपीएस कार्डियोलॉजी इंस्टीट्यूट के निदेशक प्रोफेसर राकेश कुमार वर्मा ने बताया कि ओपीडी में 686 रोगियों का परीक्षण किया गया। 24 घंटे में हार्ट अटैक के लक्षण वाले 52 रोगी भर्ती किए गए। बुधवार को हार्ट अटैक के लक्षण वाले 110 रोगी इमरजेंसी में आए। प्रोफेसर वर्मा का कहना है कि उलझन, घबराहट, तेज धड़कन, पसीना आना, सांस फूलना आदि लक्षण उभरने पर तुरंत आकर अस्पताल में जांच कराएं। लक्षणों को नजर अंदाज करने और इधर-उधर भटकने से स्थिति घातक हो जाती है।
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग के वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. आदित्य कुमार ने बताया कि ब्रेन हेमरेज के ज्यादातर रोगियों का बीपी एकदम से बढ़ गया। इन रोगियों ने बीपी की दवा बीच में छोड़ दी थी। न्यूरो साइंसेस विभाग के प्रमुख डॉ. मनीष सिंह ने बताया कि 40 फीसदी ब्रेन स्ट्रोक के रोगी घर पर ही दम तोड़ देते हैं। गोल्डन पीरियड में इक्का-दुक्का रोगी ही अस्पताल पहुंच पा रहे हैं। युवावस्था में भी ब्रेन स्ट्रोक पड़ रहा है।
यह ध्यान रखें
- दवा खत्म हो जाए तो तुरंत फिर से लें, लापरवाही न करें
- यह सोचकर दवा न छोड़ें कि बीपी सामान्य हो गया है
- अगर पुरानी खुराक से बीपी सामान्य नहीं है तो डॉक्टर को दिखाएं
- बड़ी उम्र के रोगी सुबह और शाम को बाहर घूमने न निकलें
- धूप निकलने के बाद ही टहलने के लिए जाएं
- अगर हालत बिगड़ रही है तो तुरंत सीधे अस्पताल जाएं