कानपुर में पहली बार अखिल भारतीय आयुर्वेदिक महासम्मेलन शनिवार से आयोजित किया जा रहा है, पर यहां के आयुर्वेदिक अस्पताल स्वयं बीमार पड़े हैं। 27 में से 20 अस्पताल किराए के मकानों में चल रहे हैं, जबकि दो नि:शुल्क उपलब्ध कराए गए भवनों में हैं। डॉक्टरों की कमी की वजह से कई डॉक्टर दो-दो अस्पतालों में इलाज कर रहे हैं। बजट की काफी कमी है।
नगर में आयुर्वेद के 27 अस्पताल हैं। इनमें से प्रेमपुर, जामू, उत्तरीपूरा सहित छह अस्पताल ही सरकारी जमीन पर बने हैं। राम नगर (चौबेपुर) और पुरईहार (इलाहाबाद रोड) अस्पताल नि:शुल्क उपलब्ध कराए गए मकानों में चल रहे हैं। अन्य सभी अस्पताल किराए के मकानों पर चल रहे हैं। विभाग के पांच बड़े अस्पताल हैं, इनमें से रतन लाल नगर अस्पताल 25 बेड का है।
चार अस्पताल 15-15 बेड हैं, अन्य सभी अस्पतालों में चार-चार बेड हैं। इस प्रकार लगभग 60 लाख आबादी वाले नगर के सभी आयुर्वेदिक अस्पतालों में मात्र 158 बेड हैं, वह भी डॉक्टरों, फार्मेसिस्टों, दवाओं से लेकर अन्य चिकित्सा व्यवस्थाओं में कमी की वजह से उपेक्षा का शिकार हैं। इन अस्पतालों में कभी-कभार ही इक्का-दुक्का मरीज भर्ती होते हैं।
राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालयों में काफी दवाएं हैं। सीमित संसाधनों में बेहतर इलाज की कोशिश की जा रही है। मरीजों की संख्या बढ़ी है।
- डॉ. राजेश शुक्ला, क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी
बजट की कमी है। डॉक्टरों के तमाम पद खाली हैं। आयुर्वेद में प्रोन्नति के अवसर नहीं हैं। मंडल स्तर पर अधिकारी होना चाहिए। पर्याप्त बजट और सुविधाएं मिलें तो मरीजों को ज्यादा लाभ मिल सकता है।
- डॉ. निरंकार गोयल, पूर्व क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी
डेमो पिक
- आयुर्वेद अस्पतालों की संख्या - 27
- दवाओं के लिए आवंटित बजट मात्र 18 लाख
- राष्ट्रीय आयुष मिशन से प्राप्त दवाओं की अनुमानित लागत - करीब 48 लाख
- आयुष निदेशालय से प्राप्त दवाओं की अनुमानित लागत - 10 लाख
- आयुर्वेद डॉक्टरों के सृजित पद - 32
- तैनात डॉक्टर-18
- बड़े अस्पताल - रतन लाल नगर, गीता नगर, हरजेंदर नगर, बैरी (बिठूर), घाटमपुर
चौबेपुर में बन रहा है 50 बेड का आयुर्वेदिक अस्पताल
प्रदेश सरकार की तरफ से चौबेपुर के ग्राम निगोह में 50 बेड का आयुर्वेदिक अस्पताल बनवाया जा रहा है। 9 करोड़ से बन रहे इस अस्पताल का लगभग 50 प्रतिशत निर्माण पूरा हो गया है। साल के अंत तक इस अस्पताल को चालू करने की योजना है। डॉ. निरंकार गोयल के अनुसार कल्याणपुर - बिठूर रोड पर डीपीएस कालेज के पास विभाग की एक एकड़ जमीन पड़ी है। इस पर बड़ा आयुर्वेदिक अस्पताल बन सकता है।
लाइफस्टाइल डिसीज में फायदेमंद हैं आयुर्वेद दवाएं
अखिल भारतीय आयुर्वेद महासम्मेलन में शामिल होने के लिए नागपुर से आए वरिष्ठ आयुर्वेदिक विशेषज्ञ एवं शोधकर्ता डॉ. बृजेश मिश्रा के अनुसार लाइफस्टाइल डिसीज में आयुर्वेदिक दवाएं बहुत फायदेमंद हैं, बशर्ते इन्हें नियम से खाया जाए।
2000 मरीजों पर शोध करने वाले डॉ. बृजेश ने बताया कि त्रिफला, गूगल, आरोग्य वर्धनी वटी, बंग भस्म से कब्ज, उच्च रक्तचाप आदि बीमारियां ठीक हुुईं। अनियमित दिनचर्या की वजह से बीमारियां बढ़ रही हैं। लोग तुरंत लाभ के चक्कर में एलोपैथ की तरफ भाग रहे हैं, जबकि आयुर्वेद में भी बीमारियों का इलाज है।